गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर बड़ी राहत मिली है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा सरकार ने 40 दिनों की पैरोल दे दी है। बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को यह 15वीं बार पैरोल मिली है। इसके साथ ही एक बार फिर वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आएंगे, जिसको लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम को वर्ष 2017 में अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे दो अलग-अलग मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। तभी से वह हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है। इसके बावजूद बीते वर्षों में उसे कई बार पैरोल और फरलो की सुविधा मिल चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार मिली 40 दिनों की पैरोल के दौरान राम रहीम सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहेगा। इससे पहले जब भी वह पैरोल पर बाहर आया है, तब उसने डेरा परिसर में सत्संग और प्रवचन भी दिए हैं। पिछली बार अगस्त 2024 में भी उसे 40 दिनों की पैरोल मिली थी। इसके अलावा जनवरी 2024 में 20 दिन की पैरोल और अप्रैल 2024 में 21 दिन की फरलो भी दी गई थी।
राम रहीम सिर्फ बलात्कार के मामले में ही नहीं, बल्कि अन्य गंभीर मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है। वर्ष 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उसे दोषी करार दिया गया था। वहीं, डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह हत्याकांड में भी उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच में खामियों का हवाला देते हुए इस मामले में राम रहीम समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
राम रहीम को बार-बार दी जा रही पैरोल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। खासतौर पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उसे चुनावी समय के आसपास ही राहत दी जाती है। मीडिया रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर 2020 में हरियाणा विधानसभा चुनाव, फरवरी 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव, जून 2022 में हरियाणा निकाय चुनाव और अक्टूबर 2022 में उपचुनाव के दौरान भी उसे पैरोल या फरलो दी गई थी।
एक बार फिर 40 दिनों की पैरोल मिलने के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति देना न्याय व्यवस्था की भावना के खिलाफ है। फिलहाल, राम रहीम को मिली इस ताजा पैरोल ने हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।















