पटना।
सोशल मीडिया और कुछ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि नीतीश सरकार सिर्फ 1 रुपये में 1 एकड़ जमीन दे रही है, वह भी रजिस्ट्रेशन फ्री। दावा सुनने में जितना चौंकाने वाला है, उतना ही लोगों को भ्रमित करने वाला भी।
दरअसल, सरकार की ओर से सभी नागरिकों को 1 रुपये में 1 एकड़ जमीन देने की कोई सार्वभौमिक योजना नहीं है। यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। हालांकि, बिहार सरकार की कुछ विशेष भूमि नीतियां और योजनाएं जरूर हैं, जिनके तहत चयनित वर्गों को बेहद रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाती है।
किन लोगों को मिल सकती है सस्ती जमीन?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक,
- औद्योगिक निवेश,
- स्टार्टअप्स,
- शैक्षणिक/स्वास्थ्य संस्थान,
- सामाजिक कार्यों से जुड़ी संस्थाएं,
- या विशेष सरकारी परियोजनाएं
इन श्रेणियों में आने वालों को ही कुछ मामलों में प्रतीकात्मक मूल्य (जैसे 1 रुपये या नाममात्र शुल्क) पर भूमि आवंटित की जाती है। इसका उद्देश्य रोजगार सृजन, निवेश बढ़ाना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होता है।
क्या आम आदमी को मिलेगा 1 रुपये में 1 एकड़?
सीधा जवाब है—नहीं।
आम नागरिकों के लिए ऐसी कोई खुली योजना लागू नहीं है।
रजिस्ट्रेशन फ्री या 1 रुपये की जमीन जैसी बातें बिना संदर्भ के फैलाया गया अधूरा सच हैं।
सरकार का क्या कहना है?
राज्य सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि भूमि आवंटन से जुड़ी हर योजना
- तय नियमों,
- पात्रता शर्तों,
- और सरकारी अधिसूचना
के तहत ही लागू होती है। किसी भी योजना की सच्चाई जानने के लिए राजस्व विभाग या उद्योग विभाग की आधिकारिक वेबसाइट/अधिसूचना देखना जरूरी है।
“1 रुपये में 1 एकड़ जमीन” का दावा
- पूरी तरह आम जनता के लिए सही नहीं है,
- यह केवल विशेष परिस्थितियों और चुनिंदा वर्गों तक सीमित है।
ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि वायरल दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, बल्कि आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूर करें।














