बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य की सभी पांचों सीटों पर एनडीए की जीत के बाद विपक्षी दलों में खलबली मच गई है। इस चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे, वहीं राजद के भी एक विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह “वोट चोर” और “विधायक चोर” की नीति का परिणाम है। विरोध दर्ज कराने के लिए पार्टी ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस कार्यकर्ता सदाकत आश्रम के बाहर पुतला दहन करेंगे।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली नीतियों के खिलाफ पार्टी सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा तेज है कि महागठबंधन में दरार आ सकती है। विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस बार राजद और कांग्रेस को अपने ही विधायकों की गैरहाजिरी का नुकसान उठाना पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक, जब विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे तो पार्टी की ओर से उन्हें करीब 53 से 54 बार कॉल किया गया, लेकिन न तो उन्होंने कॉल रिसीव किया और न ही विधानसभा पहुंचे।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इनमें से 3 विधायकों ने मतदान किया, जबकि 3 विधायक अनुपस्थित रहे। कांग्रेस नेता लगातार दावा करते रहे कि विधायक पहुंचेंगे, लेकिन समय बीतने के बावजूद वे नहीं आए।
जो विधायक अनुपस्थित रहे, उनमें मनिहारी से मनोहर प्रसाद, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा शामिल हैं।
वहीं राष्ट्रीय जनता दल के विधायक फैसल रहमान भी मतदान में शामिल नहीं हुए, जिससे पार्टी को झटका लगा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी चरम पर है और आने वाले दिनों में इसके और भी बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

















