पटना:
बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार फिलहाल सक्रिय राजनीति में संगठनात्मक भूमिका निभाने पर जोर देंगे। जानकारी के अनुसार उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार करते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने पर फोकस करने की इच्छा जताई है।
पूरे बिहार का करेंगे दौरा, चंपारण से होगी शुरुआत
सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार राज्यभर में जनसंपर्क अभियान चलाने की तैयारी में हैं। वे अपनी इस यात्रा की शुरुआत चंपारण से करेंगे और बिहार के सभी 38 जिलों का दौरा कर आम लोगों से संवाद स्थापित करेंगे।
बताया जा रहा है कि निशांत कुमार जल्दबाजी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते, इसलिए उन्होंने डिप्टी सीएम पद को स्वीकार नहीं किया।
परिवारवाद के खिलाफ छवि बरकरार
निशांत कुमार के इस फैसले से सियासी गलियारों में हलचल जरूर बढ़ी है, लेकिन इससे नीतीश कुमार की परिवारवाद के खिलाफ बनी छवि को भी मजबूती मिली है। यह निर्णय साफ संकेत देता है कि वे धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहते हैं।
जमीनी स्तर पर समझेंगे जनसमस्याएं
सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार फिलहाल सीधे सत्ता की राजनीति में आने के बजाय जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझने पर ध्यान देंगे। साथ ही वे नीतीश कुमार द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों का फीडबैक भी लेने की योजना बना रहे हैं।
एनडीए सरकार में बदली भूमिका, भाजपा के पास नेतृत्व
राज्य की नई एनडीए सरकार में जदयू की भूमिका में बदलाव देखने को मिला है। अब सरकार में नेतृत्व की कमान भाजपा के हाथ में है, जबकि जदयू सहयोगी दल की भूमिका निभा रही है।
पहली बार भाजपा से मुख्यमंत्री बना है, वहीं जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।
विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव बने डिप्टी सीएम
निशांत कुमार के डिप्टी सीएम पद नहीं लेने के बाद पार्टी को अनुभवी चेहरों की जरूरत थी। ऐसे में विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पार्टी का मानना है कि इन दोनों नेताओं के अनुभव से एनडीए सरकार में जदयू की स्थिति मजबूत बनी रहेगी और सरकार संचालन में संतुलन बना रहेगा।















