पटना में ग्रामीण कार्य विभाग की एक अहम समीक्षा बैठक ने प्रशासनिक तंत्र को साफ संदेश दे दिया है—अब सुस्ती नहीं चलेगी। अपर सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में हुई इस हाई-लेवल बैठक में कामकाज की रफ्तार, लंबित फाइलों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया गया।
बैठक में प्रशाखा-04 के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान लंबित संचिकाओं और प्राप्त पत्रों के निपटारे में हो रही देरी पर नाराजगी जताई गई। साफ शब्दों में कहा गया कि अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी और सभी मामलों को तय समयसीमा में निपटाना अनिवार्य होगा।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे केवल काम पूरा करने पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और जनहित पर भी बराबर ध्यान दें। प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया, ताकि जनता का भरोसा मजबूत हो सके।
तकनीकी दक्षता को भी बैठक का प्रमुख मुद्दा बनाया गया। जिन कनीय अभियंताओं ने अब तक कंप्यूटर सक्षमता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें तुरंत तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि वे व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क कर ऐसे कर्मचारियों को जल्द परीक्षा पास करने के लिए प्रेरित करें।
इसके अलावा, सेवानिवृत्त कर्मियों के लंबित भुगतान को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। HRMS Portal पर लंबित पेंशन और अन्य सेवान्त लाभों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का आदेश दिया गया, ताकि किसी भी कर्मचारी को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन मामलों में प्रक्रियात्मक अड़चनें आ रही हैं, उन्हें विभागीय समन्वय बढ़ाकर जल्द सुलझाया जाए।
कुल मिलाकर, यह बैठक सिर्फ समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप पेश करती नजर आई। आने वाले समय में इसका असर कामकाज की गति और सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधे तौर पर देखने को मिल सकता है।
















