बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास मत पर चल रही बहस के बीच शराबबंदी कानून एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया। डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए साफ कर दिया कि राज्य में लागू बिहार शराबबंदी कानून किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि इस कानून को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, वे राजनीतिक हैं, जबकि हकीकत यह है कि यह कानून समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर कानून का उल्लंघन करने वाले लोग गिरफ्तार हो रहे हैं और उन्हें सजा मिल रही है, तो यह इसकी विफलता नहीं बल्कि सफलता का संकेत है।
विजय चौधरी ने इस कानून को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बड़े सामाजिक फैसलों में से एक बताते हुए कहा कि इसे कमजोर करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट और अडिग है।
सदन में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब यह कानून लागू किया गया था, उस समय जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, वे उस राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे। अब वही लोग इसे लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आगे गठबंधन राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 के चुनाव के बाद, जब एनडीए को अपेक्षाकृत कम सीटें मिली थीं, तब भी भारतीय जनता पार्टी ने सहयोग और संतुलन दिखाते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार किया। यह गठबंधन की मजबूती और राजनीतिक परिपक्वता का उदाहरण है।
विजय चौधरी ने मौजूदा नेतृत्व परिवर्तन का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भी वही सहयोग और स्थिरता देखने को मिल रही है, जो एनडीए की पहचान रही है।
कुल मिलाकर, विधानसभा में यह बहस सिर्फ विश्वास मत तक सीमित नहीं रही, बल्कि शराबबंदी जैसे बड़े सामाजिक मुद्दे पर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। एक तरफ सरकार इसे सफल प्रयोग बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे सवालों के घेरे में रखकर राजनीतिक बहस को और धार दे रहा है।
पटना से राहुल कुमार














