बिहार के भागलपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां 18 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मरीन इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर जब उनके घर पहुंचा, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। सन्हौला प्रखंड के रानी बामिया गांव निवासी देवनंदन सिंह का शव बुधवार रात भागलपुर के माशाकचक स्थित उनके आवास पर लाया गया।
जैसे ही ताबूत घर के आंगन में पहुंचा, परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। ताबूत खुलते ही पूरे घर में चीत्कार और सिसकियों की आवाज गूंज उठी। पत्नी, पुत्री और अन्य परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। यह मंजर इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
पड़ोसी, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद थे और परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दुख इतना गहरा था कि शब्द भी कम पड़ते नजर आए। हर चेहरा शोक में डूबा हुआ था।
हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार परिजनों ने मृतक को तुलसी दल और गंगाजल अर्पित कर अंतिम विदाई दी। इसके बाद देर रात शव को बरारी गंगा घाट ले जाया गया, जहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
देवनंदन सिंह की असामयिक मौत से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा गांव और इलाका शोक में डूब गया है। लोग इसे एक अपूरणीय क्षति बता रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर जिंदगी की अनिश्चितता और नाजुकता की याद दिलाती है, जहां एक परिवार अपने प्रियजन के लौटने का इंतजार करता रहा, लेकिन अंत में उसे ताबूत में बंद खामोशी के साथ विदाई देनी पड़ी।














