बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का आज 10वां दिन हंगामेदार रहा। सदन में आरक्षण और यूजीसी कानून को लेकर जमकर बहस और नोकझोंक देखने को मिली। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि वे यूजीसी कानून को लागू कराकर रहेंगे और राज्य में आरक्षण की सीमा 85 प्रतिशत तक बढ़वाने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे।
85 प्रतिशत आरक्षण की मांग
राजद विधायक ने कहा कि बिहार में जातीय गणना के बाद 65 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन उसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया। उनका तर्क था कि जब तक इसे नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक यह कानूनी चुनौती से मुक्त नहीं होगा। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 85 प्रतिशत करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए।
भाई वीरेंद्र ने कहा कि पिछड़े, अतिपिछड़े और दलित समुदायों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार इस दिशा में पहल करती है तो विपक्ष पूरा समर्थन देगा।
यूजीसी कानून पर भी सियासत
विधायक ने यूजीसी कानून को लेकर भी सरकार और एनडीए पर निशाना साधा। उनका आरोप था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने पहले इस मुद्दे को आगे बढ़ाया, लेकिन बाद में अपने ही लोगों के जरिए अदालत में इसे रुकवाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीतिक खेल खेला जा रहा है, लेकिन राजद इसे लागू कराने के लिए सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेगा।
विवादित बयान से बढ़ा सियासी तापमान
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान भाई वीरेंद्र ने एक विवादित बयान भी दे दिया। उन्होंने कहा, “हम 85 प्रतिशत हैं, 90 प्रतिशत हैं… यूजीसी हम लागू करवा कर रहेंगे। जिसको साथ रहना है रहे, और जिसको जाना है वो घर जाएं।” उनके इस बयान को लेकर सियासी हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
राजद विधायक के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है। बजट सत्र के बीच आरक्षण और यूजीसी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उठी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या विपक्ष की मांगों पर कोई ठोस पहल होती है या नहीं।














