बिहार में अब प्रशासनिक सख्ती के नए दौर की शुरुआत दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राज्य में भी ‘योगी मॉडल’ की झलक देखने को मिल रही है। इसी क्रम में बिहार के कई जिलों में अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र कार्रवाई शुरू की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण किसी भी हाल में नहीं बचेंगे।
जानकारी के अनुसार, बीते 48 घंटों में प्रदेश के कई जिलों — पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर और सारण — में जिला प्रशासन और नगर निगम टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया। अवैध कब्ज़ों, बिना नक्शा पास कराए बनाए गए दुकानों, घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चिह्नित कर बुलडोज़र से ध्वस्त किया गया।
पटना में सबसे बड़ी कार्रवाई
राजधानी पटना में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत मुख्य मार्गों और सरकारी भूमि पर बने दर्जनों अवैध निर्माण ढहा दिए गए। प्रशासन का कहना है कि वर्षों से कब्ज़ा कर रखे गए प्लॉट और सड़क किनारे बनाए गए असंगठित ढांचों के कारण यातायात और शहर की योजना बुरी तरह प्रभावित हो रही थी।
गया और मुजफ्फरपुर में भी कड़ी कार्रवाई
गया में जिला प्रशासन ने रेलवे भूमि और सरकारी संपत्ति पर बने कई अवैध दुकानों पर बुलडोज़र चलाया। वहीं मुजफ्फरपुर में भी न्यू बाईपास और ब्रह्मपुरा इलाके में बड़ी कार्रवाई की गई।
अधिकारियों का बयान
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान नियमन, सुशासन और शहरी विकास को सुदृढ़ करने के लिए चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा:
“राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है—अवैध कब्ज़ा और बिना अनुमति के निर्माण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। जनता की सुविधा और शहरों की व्यवस्थित विकास योजना सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया
जहां एक ओर आम जनता प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत कर रही है, वहीं प्रभावित लोगों ने इसे “कठोर” और “अचानक” बताया है। कई लोगों ने मुआवज़े और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।
आगे और सख्ती के संकेत
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में कई और जिलों में इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। सरकार का रुख साफ है—अवैध अतिक्रमण को लेकर अब ज़ीरो टॉलरेंस।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट














