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बिहार में 600 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, ग्रामीण अस्पतालों से मेडिकल कॉलेजों तक मिली नई ताकत

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 600 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों और सीनियर रेजिडेंट्स की नियुक्ति और पदस्थापन का आदेश जारी किया है। दो अलग-अलग अधिसूचनाओं के माध्यम से परास्नातक (PG) उत्तीर्ण डॉक्टरों को ग्रामीण अस्पतालों में और सीनियर रेजिडेंट्स को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव हिमांशु शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पीजी उत्तीर्ण 298 डॉक्टरों को ‘बंध-पत्र’ (Bond) के तहत अनिवार्य सेवा के लिए नियुक्त किया गया है। इन डॉक्टरों को राज्य के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), अनुमंडल अस्पतालों (SDH) और रेफरल अस्पतालों में पदस्थापित किया गया है।

इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रति माह 85,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा और उन्हें एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान देना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

मेडिकल कॉलेजों में भी 309 सीनियर रेजिडेंट्स की नियुक्ति

एक अन्य बड़े फैसले में बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद की अनुशंसा पर 309 डॉक्टरों को राज्य के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तीन वर्षों के टेन्योर पदों के लिए की गई है।

इन डॉक्टरों को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH), नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH), दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) और श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SKMCH) सहित राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में तैनात किया गया है। इस कदम से चिकित्सा शिक्षा और सुपर स्पेशलिटी उपचार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इन विभागों में सबसे ज्यादा डॉक्टरों की तैनाती

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार कई प्रमुख विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है।

  • जनरल सर्जरी: लगभग 50 डॉक्टर
  • जनरल मेडिसिन: 43 डॉक्टर
  • स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनेकोलॉजी): 37 डॉक्टर
  • शिशु रोग (पीडियाट्रिक्स): 31 डॉक्टर
  • हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक्स): 20 डॉक्टर
  • नेत्र रोग (ऑफ्थैल्मोलॉजी): 19 डॉक्टर

इसके अलावा सुपर स्पेशलिटी विभागों में भी डॉक्टरों की तैनाती की गई है।

  • कार्डियोलॉजी: 10
  • न्यूरोसर्जरी: 19
  • नेफ्रोलॉजी: 17
  • प्लास्टिक सर्जरी: 16

अन्य विभागों में भी नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें एनेस्थीसिया (16), पैथोलॉजी (12), ईएनटी (10), डर्मेटोलॉजी (6) और एनाटॉमी (17) शामिल हैं।

15 दिनों में योगदान अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति नियमित नियोजन नहीं है। सीनियर रेजिडेंट्स को आवंटित संस्थानों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से योगदान देना होगा, अन्यथा उनका टेन्योर समाप्त मान लिया जाएगा।

वहीं पीजी पास डॉक्टरों से सामान्य चिकित्सा कार्यों के साथ-साथ उनकी विशेषज्ञता के अनुसार भी सेवाएं ली जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस फैसले से जिला और अनुमंडल स्तर के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा।

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