बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा कोटे से होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर राजनीतिक दल पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। सियासी गलियारों में सीटों के गणित और रणनीतियों को लेकर चर्चाएं चरम पर हैं।
सीटों के गणित में बदलाव के संकेत
सूत्रों के अनुसार, इस बार के चुनाव में महागठबंधन को करीब 2 सीटों का नुकसान हो सकता है। वहीं, तेजस्वी यादव की पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का खाता खुलने की संभावना जताई जा रही है। सभी दल अपने-अपने समीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं।
कब होंगे चुनाव
जानकारी के मुताबिक, नई सरकार के गठन के तुरंत बाद विधानसभा कोटे से विधान परिषद चुनाव की घोषणा की जाएगी। चुनाव अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई के पहले सप्ताह में कराए जा सकते हैं।
निशांत कुमार की एंट्री पर नजर
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खाली हुई सीट को लेकर है। माना जा रहा है कि इस सीट से उनके बेटे निशांत कुमार को विधान परिषद भेजा जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी मिल सकती है।
अन्य संभावित नाम और समीकरण
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार बीजेपी के मंगल पांडेय की सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भेजे जाने की चर्चा है। फिलहाल वे मंत्री हैं लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।
यदि सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर नजर डालें तो जदयू को 4, बीजेपी को 3, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 1 और राजद को 1 सीट मिल सकती है। इसके अलावा LJP (रामविलास) का भी विधान परिषद में खाता खुलने की संभावना है।
28 जून को खाली होंगी 9 सीटें
28 जून 2026 को कुल 9 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें राजद की 2, जदयू की 3, कांग्रेस और बीजेपी की 1-1 सीट शामिल हैं। इन सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम भी चर्चा में हैं:
- राजद: मोहम्मद फारुक, सुनील कुमार सिंह
- जदयू: गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा
- बीजेपी: संजय मयूख
- कांग्रेस: समीर कुमार सिंह
इसके अलावा 2 सीटें पहले से खाली हैं—बीजेपी के सम्राट चौधरी और जदयू के भगवान सिंह कुशवाहा की।
उपचुनाव भी होंगे अहम
तीन सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं, जिनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी नेता मंगल पांडेय की विधानसभा कोटे की सीटें शामिल हैं। जदयू के राधा चरण सेठ की स्थानीय प्राधिकरण कोटे की सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा।
सियासी शतरंज का खेल
इस पूरे चुनावी परिदृश्य में हर राजनीतिक दल अपनी रणनीति, गठबंधन और संख्या बल के आधार पर जीत की तैयारी कर रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी शतरंज में कौन सी पार्टी बाजी मारती है और किसे नुकसान उठाना पड़ता है।















