बिहार की जमीनी राजनीति आज एक अहम पड़ाव पर खड़ी है। बिहार के 29 जिलों में 363 प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के लिए मतदान का बिगुल बज चुका है। यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं, बल्कि गांव की सत्ता, संसाधनों और स्थानीय वर्चस्व की सीधी लड़ाई बन चुका है।
प्रशासन ने चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारी की है। राजधानी पटना में बुद्ध मार्ग स्थित सहकार भवन को हेल्पलाइन सह कंट्रोल रूम में तब्दील किया गया है, जहां 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार के संयुक्त सचिव कयूम अंसारी के अनुसार, मतदाता सूची में गड़बड़ी के कारण 11 PACS का चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिलाधिकारियों ने साफ संदेश दिया है कि ड्यूटी में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कंट्रोल रूम में तीन शिफ्ट में कर्मियों की तैनाती की गई है, जो हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।
हालांकि, इस चुनावी हलचल का असर कृषि कार्यों पर भी साफ दिख रहा है। PACS की व्यस्तता के चलते रबी फसलों की सरकारी खरीद प्रभावित हुई है। मसूर, चना और तिलहन की खरीद जहां सुस्त पड़ी है, वहीं गेहूं की खरीद भी बेहद धीमी रही है। यह स्थिति तब है जब पहली बार इन फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने की घोषणा की गई थी।
राज्य के प्रमुख जिलों जैसे मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और पूर्णिया में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
इसके अलावा, किसी भी प्रकार की शिकायत या गड़बड़ी की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 7979951297 जारी किया गया है।
कुल मिलाकर, Bihar PACS Election 2026 सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि ग्रामीण सत्ता संतुलन, कृषि अर्थव्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव की बड़ी परीक्षा बन चुका है। इसके नतीजे आने वाले समय में राज्य की राजनीति और गांवों के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।



















