पटना। बिहार की राजनीति में जारी सियासी हलचल अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। नई सरकार के गठन को लेकर लंबे समय से बना सस्पेंस अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। माना जा रहा है कि खरमास के बाद राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा, हालांकि अभी भी यह साफ नहीं है कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलेगी।
सोमवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर अचानक सियासी गतिविधियां तेज हो गईं, जब केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच नई सरकार के गठन को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है, जिसमें कई बड़े फैसलों पर सहमति बनने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली से लौटने के बाद ललन सिंह उत्तर प्रदेश में पूजा-अर्चना कर सीधे पटना पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास जाकर नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान सरकार गठन की रणनीति, मंत्रिमंडल के स्वरूप और राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आज की इस बैठक में कई अहम फैसलों पर अंतिम मुहर लग सकती है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगले 48 घंटों में बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। इसी बैठक में यह भी तय किया जा सकता है कि जदयू की ओर से उपमुख्यमंत्री कौन होगा और किन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। मंत्रिमंडल के आकार, जातीय और राजनीतिक संतुलन, साथ ही नए और पुराने चेहरों के समावेश को लेकर गहन मंथन जारी है।
इस पूरी प्रक्रिया में ललन सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं, 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की अंतिम बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे मौजूदा सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनकी मौजूदगी में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
सूत्रों के मुताबिक, 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है और उसी दिन शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित होने की संभावना है। नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है, जो जदयू कोटे से हो सकते हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने डिप्टी सीएम बनने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल इस पद को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं और अगले एक साल तक राज्य का दौरा करना चाहते हैं। पार्टी का एक धड़ा उन्हें मनाने में जुटा हुआ है। यदि वे तैयार नहीं होते हैं, तो जदयू की ओर से अलग-अलग सामाजिक वर्गों से दो नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
फिलहाल, बिहार की सियासत में सबकी नजरें आज की इस अहम बैठक और आने वाले 48 घंटों पर टिकी हैं। इन फैसलों से यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथों में जाएगी और बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट















