बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद में स्वास्थ्य सेवाओं और आयुष्मान भारत योजना को लेकर तीखी बहस हुई। जेडीयू के एमएलसी संजय सिंह ने कहा कि आयुष्मान कार्ड धारकों को निजी अस्पतालों में भी पूरी सुविधा मिलनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मेदांता अस्पताल जैसे बड़े निजी अस्पताल में आयुष्मान योजना का पूरा लाभ क्यों नहीं मिल रहा है? उनका कहना था कि अगर गरीब मरीज बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं करा पाएंगे, तो वे आखिर कहां जाएंगे?
जेडीयू सदस्यों का समर्थन
जेडीयू के ही एमएलसी नीरज कुमार ने भी इस मुद्दे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार मेदांता में आयुष्मान कार्ड की सुविधा सीमित है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर क्यों नहीं मिल पा रहा है।
क्या है आयुष्मान योजना?
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाता है।
लेकिन यदि बड़े निजी अस्पताल इस योजना में शामिल नहीं होंगे या सीमित बीमारियों तक ही सुविधा देंगे, तो योजना का दायरा सीमित रह जाएगा।
सरकार का जवाब
समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि फिलहाल सीमित संख्या में अस्पताल उपलब्ध हैं और मामले को दिखवाया जाएगा।
वहीं सभापति अवधेश नारायण सिंह ने टिप्पणी की कि जब अस्पताल बिहार सरकार की जमीन पर बना है, तो योजना लागू क्यों नहीं हुई? उन्होंने जांच और समाधान का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य मंत्री का पक्ष
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मेदांता अस्पताल जिस विशेषता के लिए स्थापित हुआ है, उसी का इलाज वहां किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में लगभग 23 हजार अस्पताल सूचीबद्ध हैं। फिलहाल मेदांता में आयुष्मान कार्ड के तहत दो बीमारियों का इलाज हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन के साथ पूर्व में इकरारनामा (MoU) हुआ है, इसलिए किसी निजी अस्पताल पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।
मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में मेदांता को 500 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा, जिससे सुविधाओं का विस्तार संभव होगा।
सदन में तंज और तीखे सवाल
संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा, “क्या मेदांता सिर्फ विशेष लोगों के लिए बना है?” उन्होंने कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा—“खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा 12 आना।” उनका आशय था कि यदि गरीबों को पूरी सुविधा नहीं मिल रही, तो इतने बड़े अस्पताल का क्या लाभ?
सदन में उठी यह बहस आने वाले समय में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और आयुष्मान योजना के विस्तार पर अहम प्रभाव डाल सकती है।

















