भारत अब अपनी अगली जनगणना के साथ एक नए डिजिटल युग में प्रवेश करने जा रहा है। भारत सरकार ने घोषणा की है कि Census 2027 पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के जरिए संपन्न कराया जाएगा, जिससे देश की सबसे बड़ी जनगणना प्रणाली पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनेगी।
इस जनगणना का पहला चरण—मकान सूचीकरण और आवास गणना—2 मई 2026 से 31 मई 2026 तक चलेगा। वहीं, इससे पहले 17 अप्रैल से 1 मई 2026 के बीच नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत आम लोग अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए खुद ही अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
स्व-गणना प्रक्रिया में नागरिकों को कुल 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने होंगे। इनमें मकान की स्थिति, कमरों की संख्या, पेयजल स्रोत, शौचालय व्यवस्था, बिजली, गैस कनेक्शन, परिवहन साधन, शिक्षा और डिजिटल संसाधनों जैसी जानकारी शामिल होगी। जानकारी भरने के बाद एक विशेष SE ID (Self Enumeration ID) जनरेट होगी, जिसे बाद में जनगणना कर्मी सत्यापन के लिए उपयोग करेंगे।
यह पूरी प्रक्रिया आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से संचालित होगी, जहां ओटीपी आधारित लॉगिन के जरिए नागरिक सुरक्षित तरीके से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान आधार, पैन या बैंक से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मांगी जाएगी, और सभी डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि यह भारत की 16वीं जनगणना होगी और वर्ष 2011 के बाद पहली व्यापक गणना है। खासतौर पर बिहार जैसे बड़े राज्य में यह प्रक्रिया 265 शहरी और 534 ग्रामीण प्रशासनिक इकाइयों में लागू की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की मजबूत नींव है। इससे यह समझना आसान होगा कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है और विकास योजनाओं की सबसे ज्यादा जरूरत कहां है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस की दिशा में आगे बढ़ाएगा, जहां नीतियां वास्तविक आंकड़ों के आधार पर बनाई जाएंगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि विकास योजनाओं का लाभ भी अधिक सटीक तरीके से लोगों तक पहुंच सकेगा।





















