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नीतीश कुमार से फैसल रहमान की मुलाकात से गरमाई सियासत, बदलते समीकरणों के संकेत

बिहार की राजनीति में चल रहे उठापटक के बीच गुरुवार को एक अहम मुलाकात ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिसे राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फैसल रहमान वही विधायक हैं, जिन्होंने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। उनके इस कदम से राजद को बड़ा नुकसान हुआ था और पार्टी उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अब उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, फैसल रहमान ने इस मुलाकात को पूरी तरह विकास से जुड़ा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि उन्होंने ढाका क्षेत्र के विकास को लेकर मुख्यमंत्री से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई समेत कई बुनियादी मुद्दों पर चर्चा हुई और मुख्यमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया।

इधर, बिहार विधानसभा की 19 समितियों के गठन ने भी सियासत को नया मोड़ दे दिया है। हैरानी की बात यह है कि वोटिंग से दूर रहने वाले विधायक फैसल रहमान और कांग्रेस के मनोहर प्रसाद सिंह को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। ये समितियां वित्त वर्ष 2026-27 के लिए गठित की गई हैं, जिनका कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक रहेगा।

राजनीतिक जानकार इस पूरे घटनाक्रम को राज्यसभा चुनाव के बाद बदलते समीकरणों के तौर पर देख रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस के कुछ विधायकों की भी नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात हो चुकी है, जिससे अटकलों को और बल मिला है।

अगर फैसल रहमान राजद से अलग होते हैं या पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करती है, तो इसका सीधा असर राजद की स्थिति पर पड़ेगा। वर्तमान में बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं, जिसमें मुख्य विपक्षी दल का दर्जा पाने के लिए कम से कम 10% यानी 25 विधायकों का होना जरूरी है। राजद के पास फिलहाल 25 विधायक हैं, जिससे तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष बने हुए हैं।

ऐसे में यदि फैसल रहमान पार्टी से बाहर होते हैं, तो राजद की संख्या घटकर 24 रह जाएगी और पार्टी मुख्य विपक्षी दल का दर्जा खो सकती है। इसी वजह से अब तक उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।

कुल मिलाकर, फैसल रहमान और नीतीश कुमार की यह मुलाकात बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है, जिस पर आने वाले दिनों में सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट

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