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सूट-बूट में पहुंचा फर्जी IAS, 20 मिनट में DM ने खोल दी पोल

सारण DM कार्यालय में हड़कंप, खुद को मेरठ पोस्टेड अधिकारी बता रहा था युवक

सारण।
बिहार के प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक सूट-बूट पहना शख़्स खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताकर सीधे सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के कार्यालय में जा पहुंचा। उसकी चाल-ढाल, बातचीत का लहजा और आत्मविश्वास ऐसा था कि पहली नज़र में किसी को शक नहीं हुआ, लेकिन जिलाधिकारी के सधे सवालों के आगे उसकी झूठी पहचान ज्यादा देर टिक नहीं सकी।

करीब 20 मिनट की बातचीत के दौरान जैसे-जैसे जिलाधिकारी ने सवालों का दायरा बढ़ाया, वैसे-वैसे कथित अधिकारी की हनक ढीली पड़ने लगी। अंततः फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं। बिना देर किए जिलाधिकारी ने सुरक्षा कर्मियों को बुलाया और युवक को नगर थाना के हवाले कर दिया।

पकड़े गए शख़्स की पहचान सदर प्रखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत बसाढी गांव निवासी कृष्णा पंडित के पुत्र रितेश कुमार के रूप में हुई है। वह अपने बड़े भाई मुन्ना पंडित के साथ डीएम से मिलने पहुंचा था। सूचना मिलते ही एसडीपीओ रामपुकार सिंह मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की कमान संभालते हुए नगर थाना को त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।

पूछताछ के दौरान रितेश कुमार ने खुद को उत्तर प्रदेश के मेरठ में तैनात IAS अधिकारी बताया। चूंकि जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव स्वयं उत्तर प्रदेश कैडर से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उन्हें शुरू से ही संदेह हुआ। सवाल-जवाब का शिकंजा कसते ही झूठ की इमारत ढह गई और फर्जी IAS का भंडाफोड़ हो गया।

थाने में पूछताछ के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया। जानकारी मिली कि रितेश डीएम से मिलने से पहले एसएसपी से भी मुलाकात कर चुका था। इतना ही नहीं, वह पूर्व जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों से भी कई बार मिल चुका है। यानी लंबे समय से वह सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर नकली पहचान के सहारे बड़े अधिकारियों से संपर्क करता रहा।

गांव बसाढी में भी रितेश की हनक कम नहीं थी। ग्रामीणों के अनुसार, वह खुद को IAS अधिकारी बताकर रौब झाड़ता था। कई बार स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ उसकी उठक-बैठक देखी गई, जिससे किसी को उस पर शक करने का मौका ही नहीं मिला। अब जब उसकी असलियत सामने आ गई है, तो गांव में चर्चा का माहौल गर्म है।

हालांकि, साथ में पकड़े गए बड़े भाई मुन्ना पंडित ने पुलिस को अलग कहानी बताई है। उसका दावा है कि रितेश मानसिक रूप से विक्षिप्त है। उसके पास सिर्फ 100 रुपये थे, जिन्हें उसने गुलदस्ता खरीदने में खर्च कर दिया और अधिकारियों से मिलने निकल पड़ा।

नगर थाना अध्यक्ष के अनुसार, फिलहाल जिलाधिकारी की ओर से लिखित आवेदन का इंतजार किया जा रहा है। आवेदन मिलते ही फर्जीवाड़ा, प्रतिरूपण और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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