अगवा कर रातों-रात कराई शादी, वायरल वीडियो के बाद हरकत में आई पुलिस
खगड़िया।
बिहार में कानून के राज की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खगड़िया जिले से सामने आए ‘पकड़ौआ शादी’ के एक ताजा मामले ने न सिर्फ पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में आज भी जड़ जमाए उस आपराधिक परंपरा को उजागर कर दिया है, जहां बंदूक, दबंगई और डर के सहारे रिश्ते तय किए जाते हैं। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सनसनी फैल गई है।

डुमरिया खुर्द गांव निवासी मन्नयम कुमार ने आरोप लगाया है कि उसे गाय दिखाने के बहाने घर से बुलाया गया और फिर साजिश के तहत अगवा कर लिया गया। पीड़ित के मुताबिक, गांव के ही कमल कुमार राय उसे कन्हैयाचक गांव ले गया, जहां से अलग-अलग गांवों में घुमाते हुए उसे सिराजपुर पहुंचाया गया। यहीं से मामला आपराधिक रंग में बदल गया।
मन्नयम कुमार का कहना है कि मोबाइल चार्ज कराने के बहाने उसका फोन छीन लिया गया। जब उसने घर लौटने की बात कही तो 3-4 लोगों ने उसे घेर लिया। इसके बाद हथियार लहराते हुए धमकियां दी गईं और साफ शब्दों में कहा गया—“शादी करो या अंजाम भुगतो।” इंकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई। खौफ और डर के माहौल में, रात के अंधेरे में उसकी जबरन शादी कुंदन कुमारी से करा दी गई।
पीड़ित का कहना है कि यह शादी नहीं, बल्कि अपराध का तमाशा था, जिसमें उसकी मर्जी का कोई मतलब नहीं था। हालांकि, इस मामले में तब नया मोड़ आया जब युवक के परिजनों को घटना की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और युवक को मुक्त कराया गया।
मन्नयम कुमार ने परबत्ता थाना में लिखित शिकायत देकर अपहरण, मारपीट और जबरन विवाह जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

वहीं, लड़की पक्ष पूरे मामले को सिरे से खारिज कर रहा है। उनका दावा है कि यह पकड़ौआ शादी नहीं, बल्कि आपसी सहमति से हुआ विवाह है। लड़की का कहना है कि युवक का पहले से उनके घर आना-जाना था और थाने में दिया गया आवेदन बहनोई के दबाव में लिखवाया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि सच्चाई क्या है—क्या यह बंदूक की नोक पर कराया गया रिश्ता है या फिर रजामंदी की आड़ में गढ़ी गई एक कहानी? फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
बहरहाल, यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि बिहार में पकड़ौआ शादी जैसी कुप्रथा पर कब पूरी तरह लगाम लगेगी, या फिर यह सवाल यूं ही कानून की फाइलों में दबा रह जाएगा।


















