बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों से गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में नवादा से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने में गंभीर अनियमितता पाई गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में कुल 386 शिक्षक-शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिला शिक्षा विभाग ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, डीपीओ स्थापना शिव कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि 30 मार्च को कई शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति ‘प्रेजेंट’ दर्ज की, जबकि अटेंडेंस टाइप में ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ लिखा गया। लेकिन ‘मार्क ऑन ड्यूटी रीजन’ कॉलम को या तो खाली छोड़ दिया गया या उसमें ‘डेपुटेशन’ और ‘ऑफिस वर्क’ जैसी प्रविष्टियां दर्ज कर दी गईं।
शिक्षा विभाग ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन और मनमानी करार दिया है। अधिकारियों का कहना है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सही तरीके से होनी चाहिए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग ने संबंधित सभी शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा के अंदर जवाब नहीं देने पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत के तहत वेतन कटौती की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का उद्देश्य स्कूलों में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहें और पढ़ाई प्रभावित न हो।
इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षकों में हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगे विभाग इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है।















