देश की नौकरशाही और राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले R. K. Singh (राज कुमार सिंह) ने अब अपने करियर की नई पारी शुरू कर दी है। उन्होंने घोषणा की है कि वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य बन गए हैं और अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत करेंगे।
आर.के. सिंह ने अपने फैसले के साथ एक स्पष्ट संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, “I have become a member of the Supreme Court Bar. I will fight for preserving our democracy and citizen’s rights.” यानी वे लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
1975 बैच के IAS अधिकारी रहे आर.के. सिंह ने देश के गृह सचिव जैसे अहम पद पर कार्य किया है। गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, नक्सलवाद और आतंकवाद से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला। खास तौर पर 2008 Mumbai attacks के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
बिहार में भी उनकी प्रशासनिक छवि काफी मजबूत रही है। समस्तीपुर के जिलाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल सबसे ज्यादा चर्चित रहा। 1990 के दशक में L. K. Advani की रथ यात्रा के दौरान, तत्कालीन मुख्यमंत्री Lalu Prasad Yadav के आदेश पर आडवाणी की गिरफ्तारी को लागू कराने की जिम्मेदारी आर.के. सिंह ने निभाई थी, जिसे उनकी सख्त प्रशासनिक शैली का बड़ा उदाहरण माना जाता है।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने Bharatiya Janata Party (भाजपा) का दामन थामा और 2014 में बिहार की आरा लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुंचे। 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज की और Narendra Modi सरकार में ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में ग्रामीण विद्युतीकरण और बिजली क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए गए।
हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद भी सामने आए। इसके बाद अब उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते हुए कानून के क्षेत्र में वापसी का निर्णय लिया है।
आर.के. सिंह का सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने का फैसला महज करियर बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संकेत भी माना जा रहा है। प्रशासन, राजनीति और अब न्यायपालिका—तीनों क्षेत्रों का अनुभव रखने वाले सिंह अब संवैधानिक मुद्दों पर अपनी मजबूत पकड़ के साथ अदालत में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।















