बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को मिली करारी हार के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी रहे शिवानंद तिवारी अब खुलकर नाराज़गी जताने लगे हैं। लगातार किए जा रहे उनके खुलासों और बयानों ने बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है।
लालू को बताया ‘धृतराष्ट्र’, तेजस्वी पर भी कटाक्ष
शिवानंद तिवारी ने अपने ताज़ा बयान में कहा कि राजद की हार ने लालू यादव को “धरती सुंघा दी है”। उन्होंने दावा किया कि तेजस्वी यादव का “अपना कोई व्यक्तित्व नहीं है” और वे सिर्फ़ लालू यादव की ही आधुनिक प्रतिकृति हैं।
उन्होंने कहा कि लालू यादव पुत्र मोह में अंधे हो चुके हैं और उनकी राजनीति का अवसान पहले ही हो चुका है। तिवारी ने कहा कि लालू की राजनीतिक ताकत मंडल आंदोलन और रामरथ यात्रा रोकने जैसे अवसरों से बनी थी, लेकिन उसे अच्छी तरह संभाला नहीं गया।
“भाजपा पहली बार बहुमत की दहलीज़ पर”
तिवारी ने दावा किया कि इस चुनाव ने एक नया राजनीतिक गणित रेखांकित किया है। उनके अनुसार, पहली बार भाजपा अपने सहयोगियों के साथ बिहार में पूर्ण बहुमत के करीब पहुंचती दिखी है।
उन्होंने कहा कि यह जमीन बुद्ध, गांधी, लोहिया और जेपी के संघर्षों की धरती है, जहां हिंदुत्व की विचारधारा को स्थान नहीं मिलता रहा, परंतु 2025 के चुनाव ने यह स्थिति बदल दी।
नीतीश कुमार पर भी टिप्पणी—“अंदर से कमज़ोर, जोखिम उठाने वाले नहीं”
शिवानंद तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वे “अंदर से कमज़ोर व्यक्ति” हैं और जोखिम भरे फैसले कभी नहीं लेते।
उन्होंने दावा किया कि सामाजिक न्याय आंदोलन का विस्तार भले नीतीश ने किया, पर उनके भीतर अनिश्चितता और हिचकिचाहट हमेशा रही।
महागठबंधन की पृष्ठभूमि पर बड़ा खुलासा
शिवानंद तिवारी ने बताया कि 2015 के चुनाव में गठबंधन बनने के पीछे गैर-भाजपा दलों का दबाव था। गठबंधन का नाम “महागठबंधन” नीतीश कुमार ने रखा था।
उन्होंने कहा कि नीतीश को यह संदेह था कि लालू यादव ने जानबूझकर कई सीटों पर जदयू उम्मीदवारों को हराने का प्रयास किया था।
नीतीश–लालू रिश्ते पर तिवारी का कटाक्ष
उन्होंने कहा कि नीतीश और लालू का साथ टिकने वाला नहीं था। नीतीश बार-बार गठबंधन छोड़ते और लौटते रहे, जो इस बात का संकेत है कि दोनों नेतृत्व एक-दूसरे पर कभी पूरी तरह भरोसा नहीं कर पाए।
“नीतीश ने अपना वारिस नहीं बनाया—क्या बिहार भाजपा के हवाले होगा?”
तिवारी ने अपने बयान के अंत में बड़ा सवाल उठाया:
“नीतीश कुमार ने अपना कोई राजनीतिक वारिस नहीं बनाया। उनके बाद उनके समर्थक कहाँ जाएंगे? लालू के साथ जाना संभव नहीं, इसलिए वे भाजपा की ओर बढ़ेंगे और बिहार में हिंदुत्ववादियों का क्षत्रराज स्थापित होगा।”
उन्होंने कहा कि नीतीश खुद को गांधी का अनुयायी बताते हैं, ऐसे में उनके फैसलों से बिहार का भविष्य किस दिशा में जाएगा, यह बड़ा प्रश्न है।















