सुपौल शहर में शुक्रवार को उस समय सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई, जब लोहियानगर चौक पर प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान चलाया। सड़क किनारे वर्षों से फल और सब्जी की दुकान लगाकर कारोबार कर रहे दर्जनों दुकानदारों को हटाते हुए इलाके को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
कार्रवाई के दौरान हल्की नोकझोंक जरूर हुई, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही।
जाम और यातायात बनी बड़ी वजह
प्रशासन का कहना है कि लोहियानगर चौक पर बढ़ते जाम और अव्यवस्थित यातायात से आम नागरिकों की परेशानी बढ़ गई थी।
- एम्बुलेंस को निकलने में दिक्कत
- स्कूली वाहनों की आवाजाही बाधित
- रोजाना लंबा ट्रैफिक जाम
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को जाम मुक्त रखना और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अतिक्रमण हटाओ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दुकानदारों का दर्द
दूसरी ओर, हटाए गए दुकानदारों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। अचानक की गई कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है।
कई दुकानदारों ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना के उन्हें हटाया गया, जिससे उनका सामान भी नुकसान में चला गया। उन्होंने प्रशासन से वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उनका कारोबार जारी रह सके।
दुकानदारों का तर्क है कि वे भी शहर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और मेहनत-मजदूरी से अपना जीवन यापन करते हैं।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का एक वर्ग प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। उनका कहना है कि चौक पर रोज लगने वाले जाम से आम राहगीरों को भारी परेशानी होती थी और अब राहत की उम्मीद जगी है।
संतुलन की चुनौती
सुपौल में यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि प्रशासन अब सख्ती के मूड में है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या जाम से राहत और छोटे कारोबारियों के रोजगार के बीच कोई संतुलित समाधान निकलेगा, या यह टकराव आगे और गहराएगा?

















