अजय शास्त्री ब्यूरो प्रमुख पटना…
बक्सर: कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र में स्कूली छात्राओं से जुड़ी कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने का मामला अभी चर्चा में ही था cकि अब बक्सर नगर के कोइरपुरवा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय बालिका कल्याण छात्रावास से छात्राओं की निजता से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि छात्रावास में तैनात महिला सुरक्षा कर्मी ने छात्राओं के निजी वीडियो और तस्वीरें बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिए।
मामला सामने आने के बाद छात्राओं की सुरक्षा और छात्रावास की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आजाद समाज पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल कुमार ने इस संबंध में बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य राजू खरवार को आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

तीन महीने से शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
अनिल कुमार के अनुसार, 15 जून की रात करीब 9 बजे कुछ छात्रों ने उन्हें जानकारी दी कि बालिका छात्रावास में रहने वाली उनकी बहनों के निजी वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। सूचना मिलने के बाद जब वे छात्रावास पहुंचे तो अंदर छात्राओं और महिला सुरक्षा कर्मी पूजा कुमारी के बीच विवाद चल रहा था।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि उनके बेडरूम तथा स्नान करने के दौरान के वीडियो और तस्वीरें बनाई गईं और उन्हें इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले की जानकारी जिला कल्याण पदाधिकारी को देने के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी को सूचना दी गई।
आरोप यह भी है कि शिकायत के बाद छात्राओं को छात्रावास से नाम काटने की धमकी दी गई। साथ ही सुरक्षा कर्मी पर छात्राओं के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है।
आयोग ने जांच का दिया भरोसा
मामला राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य राजू खरवार के संज्ञान में पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही जांच कमेटी गठित की जाएगी। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा करने की बात कही गई है।

जिला कल्याण पदाधिकारी ने क्या कहा?
वहीं जिला कल्याण पदाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया था। उनके अनुसार संभवतः जन्मदिन आदि के दौरान वीडियो बनाए गए थे और इंटरनेट पर प्रसारित किए गए। उन्होंने दावा किया कि वीडियो बनाने से पहले छात्राओं की सहमति ली गई थी। हालांकि, उनके मुताबिक सुरक्षा कर्मी पूजा कुमारी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसा नहीं करने की बात कही थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि छात्राओं की निजता से जुड़े वीडियो वास्तव में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए हैं, तो उनकी अनुमति किस उद्देश्य और किस तरीके से ली गई थी? क्या वीडियो को सार्वजनिक करने की अनुमति छात्राओं ने दी थी? और यदि शिकायत कई सप्ताह पहले सामने आई थी तो अब तक मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल मामला सामने आने के बाद छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा और निजता को लेकर जिला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं













