धमदाहा (बिहार)।
धमदाहा प्रखंड के राजघाट गरैल पंचायत में किसानों के साथ बैंक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े एक रिकवरी एजेंट पर आरोप है कि उसने किसानों से केसीसी ऋण की समझौता राशि वसूल की, लेकिन बैंक में जमा नहीं कराई और फरार हो गया। इससे आधा दर्जन से अधिक किसान गंभीर संकट में हैं।
किसानों ने पुलिस और मंत्री से लगाई गुहार
पीड़ित किसानों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी और न्याय की गुहार लगाई है। इसके अलावा, उन्होंने मंत्री लेशी सिंह से भी अपनी पीड़ा साझा की। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।
वसूल की गई राशि और एजेंट का बहाना
किसानों ने बताया कि:
- अरविंद चौधरी से ₹26,000
- सर्विन चौधरी से ₹25,000
- शंभू चौधरी से ₹25,000
इसके अलावा, केशव चौधरी से ₹14,000 लेकर कहा गया कि उस दिन पर्ची उपलब्ध नहीं है, जो बाद में दी जाएगी।
ऑनलाइन भुगतान में भी धोखाधड़ी
किसानों का आरोप है कि रिकवरी एजेंट ने कुछ लोगों से सीएसपी संचालक के खाते में ऑनलाइन राशि मंगवाई, जिसे बैंक में जमा कराने का वादा किया गया। लेकिन वह राशि भी बैंक में जमा नहीं कराई गई। जब किसान स्वयं बैंक पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि जिन ऋणों की राशि उन्होंने चुका दी थी, वह अब भी बकाया दिखाई दे रही है।
बैंक और प्रशासन पर दबाव
इस मामले ने किसानों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। किसानों का कहना है कि ऋण की राशि बैंक में जमा नहीं होने से उनका कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं, बैंक और पुलिस मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाने में जुटी है।
यह घटना कृषि ऋण प्रणाली में भरोसे की कमी और एजेंटों के दुरुपयोग की ओर गंभीर संकेत देती है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष फैल रहा है।
पूर्णिया डेस्क, भड़कता बिहार














