भूकंप से जुड़ी घटनाएं इन दिनों लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बार-बार धरती कांप रही है, जिससे लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल बन गया है। ताजा मामला मेक्सिको से सामने आया है, जहां शुक्रवार को आए तेज भूकंप के झटकों ने भारी दहशत फैला दी। इस भूकंप में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
मेक्सिको की राष्ट्रीय भूकंपीय एजेंसी के मुताबिक, शुक्रवार को दक्षिणी और मध्य मेक्सिको में रिक्टर पैमाने पर 6.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप भारतीय समयानुसार शाम 7 बजकर 28 मिनट पर आया। इसका केंद्र दक्षिणी राज्य गुरेरो के सैन मार्कोस शहर के पास, प्रशांत तट पर स्थित अकापुल्को रिसॉर्ट के नजदीक था। भूकंप का केंद्र धरती से लगभग 40 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है।
तेज झटके महसूस होते ही मैक्सिको सिटी और अकापुल्को समेत आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर सड़कों पर दौड़ पड़े। कई इलाकों में कुछ देर के लिए बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित रहीं।
इस भूकंप का असर इतना ज्यादा था कि मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम की नए साल की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी। हालात सामान्य होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस दोबारा शुरू की गई। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने गुरेरो प्रांत की गवर्नर से बात कर हालात की जानकारी ली है और राहत-बचाव कार्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।
राष्ट्रीय भूकंपीय एजेंसी के अनुसार, गुरेरो में एक घर ढहने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि मैक्सिको सिटी में राहत एवं बचाव कार्य के दौरान एक व्यक्ति के गिरने से जान चली गई। इसके अलावा 12 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। राहत की बात यह रही कि अब तक बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
उधर, भूकंपीय गतिविधियों की यह श्रृंखला सिर्फ मेक्सिको तक सीमित नहीं है। इससे पहले गुरुवार को भारत के पड़ोसी देश भूटान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूटान में आए भूकंप की तीव्रता 3.5 थी और इसका केंद्र धरती से पांच किलोमीटर की गहराई में स्थित था। वहीं म्यांमार में भी गुरुवार को 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था।
लगातार हो रही इन भूकंपीय घटनाओं ने एक बार फिर दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भूकंप संभावित क्षेत्रों में सतर्कता, मजबूत निर्माण और आपदा प्रबंधन की तैयारियां पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई हैं, ताकि भविष्य में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।














