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बिहार के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड: लालू-अशोक चौधरी की बेटियां और ललन सिंह ‘नॉन परफॉर्मर’, न फंड खर्च, न सिफारिश

18वीं लोकसभा के गठन को लगभग दो वित्तीय वर्ष पूरे होने वाले हैं। इस दौरान देशभर के लोकसभा सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत दो किस्तों में 5-5 करोड़ रुपये, यानी कुल 10 करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई गई। इस फंड का उद्देश्य सांसदों के क्षेत्रों में सड़क, स्कूल, अस्पताल, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।

लेकिन बिहार के लोकसभा सांसदों के परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार के कुछ सांसद ऐसे हैं जिन्होंने न तो मिले फंड का सही इस्तेमाल किया और न ही विकास कार्यों के लिए कोई ठोस सिफारिश की।

लालू यादव और अशोक चौधरी की बेटियां शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जदयू नेता अशोक चौधरी की बेटियां इस सूची में शामिल हैं, जिनका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्रों में अब तक न तो विकास कार्यों के लिए राशि खर्च की और न ही जिला प्रशासन को कोई ठोस अनुशंसा भेजी।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी सूची में

सबसे चौंकाने वाला नाम जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रह चुके ललन सिंह का है। रिपोर्ट के अनुसार, ललन सिंह भी उन सांसदों में शामिल हैं जिन्हें ‘नॉन परफॉर्मर सांसद’ की श्रेणी में रखा गया है। उनके खाते से भी अब तक न तो राशि खर्च हुई है और न ही उल्लेखनीय विकास परियोजनाओं की सिफारिश दर्ज की गई है।

इलाके में बुनियादी सुविधाओं का हाल बेहाल

जहां एक ओर सांसदों के खाते में करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं, वहीं दूसरी ओर कई संसदीय क्षेत्रों में सड़कें जर्जर हैं, सरकारी स्कूलों की हालत खराब है और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसदों के फंड का सही उपयोग होता तो इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती थी।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के साथ धोखा बताया है, जबकि संबंधित सांसदों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद सांसदों की जिम्मेदारी केवल संसद तक सीमित नहीं होती, बल्कि क्षेत्रीय विकास भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

चुनाव से पहले रिपोर्ट कार्ड बना मुद्दा

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सांसदों का यह रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विकास फंड के इस्तेमाल को लेकर उठे सवाल सीधे जनप्रतिनिधियों की साख पर असर डाल सकते हैं।

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