पटना।
बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालों के घेरे में है। चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही जहानाबाद की 18 वर्षीय नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म, खरोंच और सिर पर चोट के निशान पाए गए हैं। इसके साथ ही नशे का इंजेक्शन दिए जाने की आशंका भी जताई गई है, जिससे यह मामला केवल दवा के ओवरडोज़ या आत्महत्या का नहीं रह गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के कंधे, सिर के पीछे और शरीर के अन्य हिस्सों पर नाखूनों से खरोंचे जाने के प्रमाण मिले हैं, जो संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट में यौन हिंसा की संभावना से भी स्पष्ट रूप से इनकार नहीं किया गया है।
पहले सुसाइड बताया गया, अब सवालों में पुलिस की भूमिका
घटना के शुरुआती घंटों में हॉस्टल प्रबंधन और पुलिस की ओर से इसे “नींद की गोलियों के ओवरडोज़” और “डिप्रेशन से जुड़ा मामला” बताया गया था। हालांकि, शुरुआती डॉक्टरों ने भी संदेह जताया था कि मामला सिर्फ दवा खाने तक सीमित नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने करीब 24 घंटे तक किसी अन्य एंगल पर गंभीरता से जांच नहीं की।
जैसे-जैसे सच्चाई सामने आने लगी, पुलिस ने सबूत मिटाने के आरोप में हॉस्टल के वार्डन मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया। छात्रा के पिता का आरोप है कि हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज डिलीट की गई, कमरे से छेड़छाड़ की गई और झूठा सुसाइड का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हुई।
पिता का आरोप: “यह आत्महत्या नहीं, सुनियोजित हत्या है”
मृतका के पिता ने साफ कहा है कि उन्होंने खुद बेटी के शरीर पर चोटों के निशान देखे हैं। उनके मुताबिक, “मेरी बेटी बेहोश हालत में थी, बोलने-हिलने की स्थिति में नहीं थी। यह एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि कई लोगों की मिलीभगत का मामला है।”
AIIMS पटना भेजी गई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए एम्स पटना भेजा गया है। एएसपी सदर-1 अभिनव कुमार ने माना है कि रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया गया है और अंतिम निष्कर्ष मेडिकल विशेषज्ञों की राय के बाद ही सामने आएगा।
क्या मिलेगा इंसाफ?
चित्रगुप्तनगर थाना में छात्रा के पिता के बयान पर कांड संख्या 14/26 दर्ज की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, अब तक हॉस्टल संचालकों पर ठोस कार्रवाई न होने से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
पटना की सड़कों पर एक बार फिर वही सवाल गूंज रहा है—अगर हॉस्टल भी सुरक्षित नहीं, तो बेटियां आखिर सुरक्षित कहां हैं?
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट













