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1 अप्रैल 2026 से बिहार में बिजली दर बढ़ने की संभावना, 35 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि का प्रस्ताव

बिहार में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने वाली नीतीश सरकार के बीच अब उपभोक्ताओं को बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, आगामी 1 अप्रैल 2026 से राज्य में बिजली महंगी हो सकती है। बिजली कंपनियों ने टैरिफ पिटीशन में सभी श्रेणियों के लिए 35 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।

बताया जा रहा है कि इस बार बिजली कंपनियों ने पुराने बकाए की बड़ी राशि को भी टैरिफ प्रस्ताव में शामिल किया है। करीब तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की दावेदारी के कारण दरों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। कंपनी द्वारा दायर याचिका पर जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब बिहार विद्युत विनियामक आयोग मार्च के दूसरे सप्ताह में नई दरों की घोषणा कर सकता है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेंगी।

जानकारी के अनुसार, कंपनी ने टैरिफ पिटीशन में वर्ष 2012 से जुड़े पुराने बकाए की मांग शामिल की है। बिजली बोर्ड के पुनर्गठन के दौरान एसेट-लायबिलिटी के नाम पर करीब 1100 करोड़ रुपये का मामला सामने आया था। उस समय यह तय किया गया था कि बोर्ड के सभी बकाया दायित्वों का वहन राज्य सरकार करेगी, लेकिन कंपनी को यह राशि नहीं मिल सकी।

वर्ष 2015 में कंपनी ने टैरिफ पिटीशन के माध्यम से इस बकाए की मांग की थी, जिसे विनियामक आयोग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि कंपनी राज्य सरकार से राशि वसूल करे। इसके बाद कंपनी ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एप्टेल) का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद एप्टेल ने आयोग के फैसले को पलटते हुए कंपनी के पक्ष में निर्णय दिया और मूल राशि के साथ ब्याज देने का निर्देश दिया। ब्याज जोड़ने के बाद यह राशि अब पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।

एप्टेल के फैसले के बाद कंपनी ने दोबारा टैरिफ पिटीशन में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल कर दी है। हालांकि जनसुनवाई के दौरान आयोग ने कंपनी से राज्य सरकार से पुनः भुगतान का प्रयास करने को कहा है। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने की स्थिति में पुराने बकाए की भरपाई के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बिजली कंपनियां मुनाफे में चल रही हैं, इसलिए दरों में संभावित वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर सीमित रखने की कोशिश की जाएगी। अब सभी की नजरें बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो मार्च के दूसरे सप्ताह में सामने आ सकता है।

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