बिहार की सियासत में नया मोड़ सामने आया है। उच्च जातियों के विकास के लिए गठित सवर्ण आयोग ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के सभी पात्र गरीबों को शत-प्रतिशत प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
नेहरू मार्ग (बेली रोड) स्थित कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश दिया गया है कि आवेदन प्रक्रिया में आ रही रुकावटों का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
नियमावली में खामियां, विभागों से मशविरा जरूरी
बैठक में यह भी सामने आया कि EWS नियमावली में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं। इन्हें दूर करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से समन्वय की जरूरत बताई गई। आयोग ने सभी जिलों से जारी, अस्वीकृत और लंबित EWS प्रमाण पत्रों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है।
पांच डिसमिल बासगीत जमीन की सिफारिश
सबसे ज्यादा चर्चा उस सिफारिश की हो रही है, जिसमें उच्च वर्ग के गरीब भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए पांच डिसमिल बासगीत जमीन देने की मांग की गई है। आयोग का तर्क है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आबादी 25.09% है, जिनमें लगभग 49.07% परिवारों की मासिक आय करीब 10 हजार रुपये है। ऐसे में आवास, शिक्षा और रोजगार में सरकारी सहयोग जरूरी है।
उम्र सीमा बढ़ाने और कोचिंग सुविधा का प्रस्ताव
आयोग ने छात्रों के लिए—
- नि:शुल्क कोचिंग
- छात्रावास की व्यवस्था
- प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा बढ़ाने (लड़कों के लिए 40 वर्ष, लड़कियों के लिए 45 वर्ष)
जैसे प्रस्ताव भी सरकार के सामने रखे हैं।
10% EWS आरक्षण के बाद बढ़ी चुनौतियां
केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर 10% EWS आरक्षण लागू किए जाने के बाद प्रमाण पत्र जारी करने में कई तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों की शिकायतें मिल रही थीं। अब आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि हकदारों को उनका अधिकार हर हाल में मिलेगा।
सियासी मायने
राजनीतिक नजरिए से यह पहल सामाजिक समीकरणों को साधने की नई कोशिश मानी जा रही है। आर्थिक न्याय के नाम पर सियासत का तराजू फिर से संतुलित करने की कवायद तेज होती दिख रही है।

















