कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड में इन दिनों रसोई गैस को लेकर अजीबोगरीब हालात पैदा हो गए हैं। एलपीजी सिलिंडर की किल्लत की खबरों के बीच इलाके में अफरा-तफरी और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। सुबह होते ही गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ गैस एजेंसियों में सिलिंडर की सप्लाई को लेकर ‘काला खेल’ चल रहा है। आम ग्राहकों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया है, जबकि दूसरी ओर चोरी-छिपे सिलिंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जहां सरकारी दर पर एलपीजी सिलिंडर करीब 1012 रुपये में मिलना चाहिए, वहीं कुछ जगहों पर इसे 1500 से 2000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इससे आम उपभोक्ता खासकर मजदूर और गरीब तबके के लोग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
दरअसल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने लोगों के बीच डर का माहौल बना दिया है। इसी वजह से कई परिवार पहले से गैस सिलिंडर जमा करने की कोशिश में जुट गए हैं। इस डर और अफवाहों ने हालात को और ज्यादा बिगाड़ दिया है।
गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग के लोग लाइन में खड़े नजर आते हैं। कई लोगों का कहना है कि घंटों इंतजार के बाद भी एजेंसी से सिर्फ यही जवाब मिलता है कि “सिलिंडर खत्म हो गया है।” कुछ एजेंसियों पर तो ताला लटका मिला, जिससे लोगों का गुस्सा और भी बढ़ गया।
जब इस मामले में एक गैस एजेंसी संचालक से बात की गई तो उनका कहना था कि फिलहाल उनके पास एलपीजी सिलिंडर का स्टॉक नहीं है, इसलिए वितरण रोक दिया गया है।
हालांकि सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
इसके बावजूद इलाके में बेचैनी कम नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की, तो गैस की ब्लैक मार्केटिंग यूं ही जारी रहेगी और आम जनता परेशान होती रहेगी।
अब सबकी निगाहें कटिहार प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस कथित ‘काले धंधे’ पर कब कार्रवाई करता है और लोगों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।















