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RSS में बड़ा संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, प्रांत प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक का प्रस्ताव

देश के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में जल्द ही बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। करीब 40 लाख स्वयंसेवकों और 83 हजार से अधिक शाखाओं वाले इस विशाल संगठन में नया ढांचा तैयार करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे संगठन की ताकत को ऊपर से नीचे नहीं बल्कि नीचे से ऊपर तक मजबूत किया जा सके।

इस अहम बदलाव का प्रस्ताव 13, 14 और 15 मार्च को हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में रखा जाएगा। संघ के अंदरूनी सूत्र इसे संगठन का “कायाकल्प” मान रहे हैं। इसका उद्देश्य संघ को पहले से अधिक टारगेट-ओरिएंटेड, जवाबदेह और परिणाम-केंद्रित बनाना है।

प्रांत प्रचारक की जगह होंगे राज्य प्रचारक

अब तक संघ के संगठनात्मक ढांचे में “राज्य” कोई अलग प्रशासनिक इकाई नहीं थी। बड़े राज्यों को कई प्रांतों में बांटा जाता था और वहां प्रांत प्रचारक नियुक्त किए जाते थे। वर्तमान में देशभर में करीब 45 प्रांत प्रचारक कार्यरत हैं।

लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। यानी जहां पहले एक राज्य में कई प्रांत प्रचारक होते थे, अब पूरे राज्य की जिम्मेदारी एक राज्य प्रचारक के पास होगी। इसके ऊपर क्षेत्र प्रचारक की व्यवस्था बनी रहेगी, लेकिन उनकी संख्या भी कम करने की योजना है।

11 क्षेत्र की जगह 9 क्षेत्र

फिलहाल संघ का संगठनात्मक ढांचा 11 क्षेत्रों में बंटा हुआ है। नए प्रस्ताव में इसे घटाकर 9 क्षेत्र करने की तैयारी है। इससे ऊपरी स्तर पर पदाधिकारियों की संख्या कम होगी, लेकिन संभाग या डिवीजन स्तर पर नए पद बनाए जाएंगे।

नई व्यवस्था के अनुसार किसी राज्य के दो प्रशासनिक मंडलों या कमिश्नरियों को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा और वहां संभाग प्रचारक नियुक्त होंगे। इससे संगठन का ध्यान सीधे जमीनी स्तर पर बढ़ेगा।

राज्यों में ऐसे होगा नया ढांचा

संघ के प्रस्तावित ढांचे के तहत अलग-अलग राज्यों में जिम्मेदारियों का बंटवारा किया जाएगा।

  • बिहार में 9 प्रशासनिक मंडल हैं, इसलिए यहां 4 से 5 संभाग प्रचारक बनाए जा सकते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में 18 मंडलों के आधार पर 9 संभाग प्रचारक नियुक्त किए जा सकते हैं।
  • मध्य प्रदेश में 10 मंडलों के आधार पर करीब 5 संभाग प्रचारक होंगे।
  • राजस्थान में 7 मंडलों के आधार पर 3 से 4 संभाग प्रचारक बनाए जा सकते हैं।
जमीनी स्तर पर बढ़ेगा संवाद

अब तक जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं को किसी अहम मसले के लिए प्रांत प्रचारक तक जाना पड़ता था, जिससे फैसलों में देरी और संगठनात्मक दूरी की शिकायतें आती थीं।

नई व्यवस्था में जिला और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ता सीधे संभाग प्रचारकों के संपर्क में रहेंगे। इससे संवाद तेज होगा और संगठन की रणनीति जमीनी हकीकत के ज्यादा करीब हो सकेगी।

संघ के भीतर यह भी चर्चा है कि जिला स्तर तक प्रचारक या सहायक प्रचारक जैसे नए पद बनाए जा सकते हैं, ताकि स्थानीय इकाइयों की कार्यक्षमता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके।

संघ के इतिहास में अहम बदलाव

संघ के इतिहास में इस बदलाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले 1949 में संघ ने अपना लिखित संविधान तैयार किया था और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को स्वीकार किया था। उसके बाद गणवेश में बदलाव जैसे छोटे परिवर्तन हुए, लेकिन संगठनात्मक ढांचे में इतना बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

2027 चुनाव से पहले होगा पहला इम्तिहान

संघ सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को सितंबर 2026 की बैठक में अंतिम मंजूरी मिल सकती है और जनवरी–फरवरी 2027 तक इसे पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस नए ग्राउंड कैडर और माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल की पहली बड़ी परीक्षा 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर संघ अब अपने ढांचे को केंद्रीकृत मॉडल से निकालकर जमीनी स्तर पर मजबूत और ज्यादा फुर्तीला बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में इसका असर भारतीय राजनीति के समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।

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