पटना: पटना हाई कोर्ट ने बेगूसराय जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पांच साल पहले हुई रिंकू कुमारी की संदिग्ध मौत के मामले में स्थानीय पुलिस की जांच को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इस केस की दोबारा जांच (Re-investigation) कराने का आदेश दिया है।
जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने मामले की जांच को गलत दिशा में मोड़ दिया था। जहां मृतका के परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या बताया था, वहीं पुलिस ने बिना ठोस आधार के इसे आत्महत्या करार देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।
कोर्ट ने कहा कि “सही और निष्पक्ष जांच, निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार का अहम हिस्सा है” और इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
पैसों के विवाद से जुड़ा मामला
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि रिंकू कुमारी ने अपने पड़ोस के दो लोगों को जमीन खरीदने के लिए 15 लाख रुपये एडवांस दिए थे। आरोप है कि पैसे हड़पने की नीयत से आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी।
पंचायत के दबाव में 4 अप्रैल 2021 को पैसे लौटाने का वादा किया गया था। उसी दिन सुबह रिंकू स्कूल के लिए निकलीं, लेकिन दोपहर में उनका शव स्कूल परिसर में संदिग्ध हालत में मिला।
शव की स्थिति ने उठाए सवाल
मृतका का शव जिस हालत में बरामद हुआ, उसने आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल खड़े कर दिए। शरीर पर धूल-मिट्टी लगी थी और गले में फंदा था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरू से ही प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की और FIR में नाम जोड़ने से इनकार किया।
IG विकास वैभव के नेतृत्व में SIT करेगी जांच
हाई कोर्ट ने अब इस केस को बेगूसराय पुलिस से हटाकर बिहार पुलिस के IG विकास वैभव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है।
कोर्ट को उम्मीद है कि नई टीम निष्पक्ष तरीके से जांच कर सच्चाई सामने लाएगी और पीड़िता की बेटी तेजस्विनी कुमारी को न्याय मिलेगा।
पांच साल बाद जगी न्याय की उम्मीद
करीब पांच साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रही तेजस्विनी कुमारी के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। अब सबकी नजर SIT जांच पर टिकी है कि क्या इस हाई-प्रोफाइल मामले में सच्चाई सामने आ पाएगी।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट















