पटना: बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का शंखनाद होते ही अब प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से ठीक पहले केंद्र सरकार की ताज़ा अधिसूचना ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की नौकरशाही में बड़ा फेरबदल तय है। बिहार कैडर के कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को अचानक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाया गया है, जिससे सत्ता के गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन से पहले ही प्रशासनिक ढांचे को रीसेट करने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। इस क्रम में 2003 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुपम कुमार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्हें केंद्र में ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पत्नी प्रतिमा एस. वर्मा को भी जनजातीय कार्य मंत्रालय में कमिश्नर नियुक्त किया गया है। इस ‘पावर कपल’ का एक साथ दिल्ली जाना बिहार सचिवालय के बदलते समीकरणों का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सिर्फ आईएएस ही नहीं, आईपीएस अधिकारियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश राठी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया है, जहां वे देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े अहम मामलों को संभालेंगे। इसके अलावा वंदना प्रेयसी को फर्टिलाइजर विभाग और श्रवनन एम. को अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक सेक्टर में तैनाती दी गई है।
प्रशासनिक हलकों में इसे महज़ रूटीन ट्रांसफर नहीं, बल्कि “सिस्टम रीसेट” के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार के गठन के साथ ही अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारियों को केंद्र भेजकर राज्य में नए चेहरों को मौका दिया जाएगा, जिससे कामकाज की गति और कार्यशैली में बदलाव आएगा।
इस बीच मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके केंद्र सरकार में जाने की संभावना प्रबल है और उन्हें नीति आयोग में सदस्य बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। दीपक कुमार 2018 से 2021 तक बिहार के मुख्य सचिव रह चुके हैं और 2021 से संविदा पर सेवाएं दे रहे हैं।
इसी के साथ सचिव अनुपम कुमार और ओएसडी गोपाल सिंह को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की सहमति बनती नजर आ रही है। अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो बिहार प्रशासन के कई अनुभवी चेहरे जल्द ही दिल्ली में अपनी नई भूमिका निभाते दिखाई देंगे।
फिलहाल, पटना सचिवालय में एक तरह का सन्नाटा पसरा हुआ है और हर अधिकारी की नजर अगली ट्रांसफर लिस्ट पर टिकी है। बताया जा रहा है कि आधा दर्जन से अधिक बड़े नाम अभी और इस सूची में शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का भी हिस्सा है। नई सरकार अपने भरोसेमंद अधिकारियों के साथ काम करना चाहती है, ताकि फैसलों की गति और प्रभाव दोनों पर उसका नियंत्रण बना रहे।
बहरहाल, बिहार में जहां एक तरफ नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है, वहीं दूसरी ओर नौकरशाही में हो रहा यह बड़ा फेरबदल आने वाले दिनों में राज्य के प्रशासनिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट















