पटना: बिहार की राजधानी पटना आज पूरी तरह सियासी गतिविधियों का केंद्र बन चुकी है। नई सरकार के गठन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल की अंतिम कैबिनेट बैठक लेकर एक लंबे राजनीतिक दौर के अंत का संकेत दे दिया है।
इसी बीच भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का पटना पहुंचना कई सियासी संकेत दे रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े विशेष विमान से पटना एयरपोर्ट पहुंचे। उनके स्वागत के लिए प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, शाहनवाज हुसैन, राधा मोहन सिंह और संजय मयूख समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
एयरपोर्ट से निकलता नेताओं का काफिला अपने आप में सत्ता परिवर्तन की ‘ग्रैंड एंट्री’ का संकेत दे रहा है। वहीं, सबसे बड़ा सियासी संकेत जदयू की ओर से मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जदयू ने अपनी प्रस्तावित विधानमंडल दल की बैठक को रद्द कर दिया है और अपने विधायकों को सीधे शाम 4 बजे होने वाली भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम गठबंधन के भीतर पूरी सहमति और नेतृत्व के केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है। इसे साफ तौर पर “पावर शिफ्ट” का संकेत माना जा रहा है, जहां अब फैसले एनडीए के संयुक्त मंच पर लिए जा रहे हैं।
शाम 4 बजे होने वाली यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहीं बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के बाद औपचारिक ऐलान भी किया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि सत्ता परिवर्तन अब लगभग तय हो चुका है और यह सिर्फ औपचारिक घोषणा भर रह गया है। जदयू का अपने विधायकों को भाजपा बैठक में भेजना इस बात का संकेत है कि गठबंधन के भीतर सहमति बन चुकी है।
कुल मिलाकर, पटना इस समय सियासी क्लाइमेक्स का गवाह बन रहा है—जहां एक तरफ पुराने नेतृत्व की विदाई है, तो दूसरी तरफ नए नेतृत्व के स्वागत की पूरी तैयारी। अब सबकी नजर उस एक ऐलान पर टिकी है, जो तय करेगा कि बिहार की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथों में जाएगी।















