पटना:
बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। सत्तापक्ष के विधायक माधव आनंद ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए शराबबंदी कानून की विस्तृत समीक्षा की मांग उठाई है।
विधानसभा में भी उठा चुके हैं मुद्दा
माधव आनंद ने कहा कि उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान भी इस विषय को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने उठाया था। उस समय उन्होंने शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा की जरूरत बताई थी, जिस पर कुछ विधायकों ने समर्थन किया, जबकि कुछ ने विरोध भी जताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को लेकर सदन के अंदर जितने गंभीर थे, बाहर आने के बाद भी उतने ही गंभीर हैं।
‘हर पहलू की होनी चाहिए समीक्षा’
विधायक का मानना है कि अब समय आ गया है कि शराबबंदी कानून के हर पहलू की गहराई से समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि इस नीति के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रभावों का समग्र आकलन जरूरी है, ताकि जनहित में सही निर्णय लिया जा सके।
नई सरकार से जताई उम्मीद
माधव आनंद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई सरकार से उम्मीद जताई कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि नई ऊर्जा और दृष्टिकोण के साथ सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा सकती है।
राजस्व नुकसान और व्यवहारिकता पर उठाए सवाल
माधव आनंद ने तर्क दिया कि बिहार जैसे लैंड-लॉक राज्य में पूर्ण शराबबंदी व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस नीति के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, जबकि इसका फायदा पड़ोसी राज्यों—झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश—के साथ-साथ नेपाल को मिल रहा है।
उनका कहना है कि जब आसपास के क्षेत्रों में शराब की उपलब्धता बनी हुई है, तो पूर्ण प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जनहित में फैसले की जरूरत
विधायक ने कहा कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को जनहित में संतुलित और व्यावहारिक फैसला लेना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा कर राज्य के हित में उचित निर्णय लेगी।















