बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब सभी की नजरें मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हैं। Samrat Choudhary के नेतृत्व में बनी नई सरकार में फिलहाल सीमित मंत्री ही शामिल हैं, लेकिन जल्द ही कैबिनेट विस्तार की तैयारी चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक, 4 मई के बाद मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है। देरी की एक बड़ी वजह पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनाव बताए जा रहे हैं, जहां भाजपा के कई नेता प्रचार में व्यस्त हैं।
अभी किसके पास कितने विभाग?
- सीएम सम्राट चौधरी: 29 विभाग
- Vijay Choudhary: 10 विभाग
- Bijendra Yadav: 8 विभाग
कैबिनेट में 70% पुराने चेहरे!
सूत्रों के अनुसार:
- करीब 70% मंत्री पुराने ही रहेंगे, जो Nitish Kumar सरकार में शामिल थे
- बाकी 30% नए चेहरे जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर चुने जाएंगे
- कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव संभव
स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे अहम विभाग पुराने मंत्रियों के पास ही बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका
मंत्रिमंडल में सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसमें:
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो)
- ‘हम’ (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा)
को भी शामिल किए जाने की संभावना है।
‘दो विभाग’ फॉर्मूला लागू
सूत्रों के अनुसार सरकार ‘दो विभाग’ फॉर्मूले पर काम कर सकती है:
- भाजपा कोटे के मंत्रियों को अधिकतम दो विभाग
- केवल अनुभवी नेताओं को ही दो विभाग दिए जाने की संभावना
क्या बोले नेता?
सीएम सम्राट चौधरी ने संकेत दिया है कि बिहार अब “मोदी और नीतीश मॉडल” पर आगे बढ़ेगा। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम निर्णय उच्चस्तरीय बैठक में लिया जाएगा।














