Cyber Fraud Case: राजकोट से एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम और साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने करीब 2500 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 20 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
राजकोट (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर ने बताया कि इस मामले में निजी बैंकों के अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में Yes Bank के पर्सनल मैनेजर मौलिक कामानी, Axis Bank के मैनेजर कल्पेश डांगरिया और HDFC Bank के पर्सनल बैंकर अनुराग बाल्धा शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि मौलिक कामानी ने पहले से गिरफ्तार आरोपियों की मदद करते हुए संदिग्ध बैंक खाते खुलवाए और उन्हें सक्रिय बनाए रखा। उसने विभिन्न दस्तावेजों का इस्तेमाल कर इन खातों को इस तरह संचालित किया कि बड़े लेन-देन पर बैंक के अलर्ट सिस्टम को भी चकमा दिया जा सके।
वहीं कल्पेश डांगरिया पर आरोप है कि उसने फर्जी पहचान के जरिए बैंक खाते खुलवाने में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर अनुराग बाल्धा ने वेरिफिकेशन और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कर इन खातों को वैध रूप देने में मदद की। इसके अलावा, ये सभी आरोपी खातों से नकदी निकालकर उसे हवाला चैनलों के जरिए आगे भेजने में भी शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, अब तक इस रैकेट से जुड़े 85 बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर इस मामले से जुड़ी 535 शिकायतें दर्ज हैं, जो इस घोटाले के व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं।
तीनों गिरफ्तार आरोपियों को फिलहाल पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि पहले से गिरफ्तार अन्य आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
यह मामला न सिर्फ साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह सिस्टम के भीतर बैठे लोग ही बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने में मददगार बन सकते हैं।

















