बिहार विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र में विश्वास मत को लेकर चल रही बहस के बीच सियासी तापमान काफी बढ़ गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बार-बार यह दावा किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी “लालू यादव की पाठशाला” से राजनीति सीखकर आए हैं। इस बयान ने सदन में विवाद को और बढ़ा दिया और सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया।
इसी बीच राजू तिवारी ने सदन में खड़े होकर तेजस्वी यादव पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पूरी तरह से सरकार के साथ है और विश्वास मत के प्रस्ताव का समर्थन करती है।
राजू तिवारी ने ‘पाठशाला’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि दूसरों की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपने घर की स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस “पाठशाला” की बात की जा रही है, वहां से आगे बढ़ने का मौका सिर्फ एक ही परिवार को मिला है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तेजस्वी यादव खुद नीतीश कुमार के साथ काम करते हुए दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में दूसरों पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता।
सदन में बोलते हुए तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र के इस “मंदिर” में विपक्ष पहले अपनी पीड़ा जाहिर करता है और फिर धन्यवाद भी देता है, लेकिन सच्चाई को स्वीकार करने से अब भी बचता है।
पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी रही, जिससे साफ हो गया कि यह सत्र सिर्फ विश्वास मत तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मंच बन चुका है। आने वाले समय में इस बहस का असर राज्य की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
पटना से राहुल कुमार














