बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास मत पर चर्चा अपने चरम पर पहुंच गई, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ‘पाठशाला’ वाले तंज का जवाब देते हुए सीएम ने साफ कहा कि वे किसी की “पाठशाला” से नहीं, बल्कि बिहार की जनता के आशीर्वाद से इस पद तक पहुंचे हैं।
अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का नाम लेते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी किसी एक परिवार या व्यक्ति की जागीर नहीं होती। लोकतंत्र में जनता तय करती है कि कौन नेतृत्व करेगा।
सीएम ने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें “बपौती की राजनीति” से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज वे जिस पद पर बैठे हैं, वह 14 करोड़ बिहारियों के आशीर्वाद का परिणाम है, न कि किसी एक व्यक्ति या परिवार की देन।
सम्राट चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कई वरिष्ठ नेताओं का समर्थन और मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके सहयोग और आशीर्वाद से ही वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी शुरुआत संघर्ष से हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में उन्हें और उनके परिवार को जेल जाना पड़ा था, और उसी दौर ने उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा दी।
सीएम ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति किसी एक “पाठशाला” से तैयार नहीं होता, बल्कि जनता के समर्थन, संघर्ष और अवसरों के आधार पर आगे बढ़ता है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उपमुख्यमंत्री और फिर मुख्यमंत्री बनने तक का अवसर दिया।
अंत में उन्होंने साफ संदेश दिया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए। इस बयान के साथ ही सदन में सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।














