बिहार के कटिहार से एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी बेटे को उम्रकैद की सजा दी है। यह मामला रिश्तों को शर्मसार करने वाली उस घटना से जुड़ा है, जिसमें एक बेटे ने अपनी ही मां की निर्मम हत्या कर दी थी।
कटिहार की अदालत में एडीजे-3 सुनील कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी मुकेश नोनिया को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
यह सनसनीखेज वारदात बारसोई थाना क्षेत्र के बलसर गांव की है, जहां करीब 10 साल पहले आरोपी ने अपनी मां हेमसरी देवी की कुदाल से वार कर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि मां ने बेहद गरीबी में भिक्षाटन कर बेटे का पालन-पोषण किया था, लेकिन उसी बेटे ने उनके जीवन का अंत कर दिया।
घटना के समय पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद मामला कोर्ट में विचाराधीन रहा। केस संख्या 63/16 और सेशन ट्रायल 118/17 के तहत इस मामले की लंबी सुनवाई चली।
सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी, डॉक्टर सहित कुल 8 गवाहों ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। मेडिकल रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों की गवाही ने आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए।
सरकारी पक्ष की ओर से एडिशनल पीपी पंचानंद सिंह ने दलील दी कि यह जघन्य अपराध है और सभी सबूत आरोपी को दोषी साबित करते हैं। वहीं बचाव पक्ष की ओर से विजय श्रीवास्तव ने अपनी दलीलें पेश कीं, लेकिन अदालत ने उन्हें पर्याप्त नहीं माना।
अंततः अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाला अपराध है। आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने यह संदेश दिया कि रिश्तों का खून करने वालों को कानून कभी माफ नहीं करता।
करीब एक दशक बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है और समाज के सामने एक कड़ा संदेश भी रखा है कि अपराध चाहे जितना पुराना हो, न्याय की प्रक्रिया अंततः अपना रास्ता बना ही लेती है।


















