जमुई-नवादा बेल्ट से सामने आया एक मामला सिर्फ आपराधिक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर करारा सवाल है। जिस खाकी वर्दी पर सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, उसी पर इस बार साजिश में शामिल होने का आरोप लगा है। अपहरण और फिरौती के इस खेल में पुलिस महकमे के ही चार लोग गिरफ्त में आए हैं।
घटना 23 अप्रैल की रात की है, जब जमुई टाउन थाना क्षेत्र के नर्वदा गांव निवासी पिंटू कुमार ने अपने भाई संतोष कुमार के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। परिवार के मुताबिक, संतोष दोपहर में अपनी कार से निकले थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। इसी बीच एक कॉल आया—डर से कांपती आवाज में बताया गया कि उनका अपहरण कर लिया गया है और जान बचाने के लिए 5 लाख रुपये लेकर नवादा आने को कहा गया।
परिवार घबराया, लेकिन उम्मीद भी थी कि किसी तरह संतोष को वापस लाया जा सके। पिंटू कुमार अपने रिश्तेदारों के साथ पैसे लेकर निकले। लेकिन यहां कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया। आरोप है कि नवादा के पास ही पूरी ‘सेटिंग’ रची गई और गाड़ी छोड़ने के नाम पर मोटी रकम वसूली गई।
जब जमुई पुलिस ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो परत-दर-परत सच्चाई सामने आने लगी। जांच में यह बात सामने आई कि इस फिरौती कांड में उत्पाद विभाग के दो एएसआई और दो होमगार्ड की भूमिका संदिग्ध ही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।
कार्रवाई तेज हुई और चारों को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए लोगों में सुजीत कुमार, दिलीप कुमार, रविंद्र कुमार और गुलशन कुमार शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब वसूली गई रकम का बड़ा हिस्सा एएसआई दिलीप कुमार के घर से बरामद हुआ। साथ ही संबंधित वाहन को भी जब्त कर लिया गया है।
यह घटना सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि उस भरोसे पर चोट है जो आम लोग पुलिस पर रखते हैं। जब कानून लागू करने वाले ही कानून से खेलते दिखें, तो व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना तय है।
फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है, लेकिन यह मामला एक बड़े बहस का विषय बन चुका है—क्या ऐसे मामलों में सख्त और उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई होगी या फिर यह भी वक्त के साथ फाइलों में दब जाएगा?
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि सुधार की जरूरत सिर्फ सड़कों या सिस्टम में नहीं, बल्कि सिस्टम चलाने वालों की नीयत और जवाबदेही में भी है।














