मुजफ्फरपुर। तिरहुत मुख्य नहर और सड़क निर्माण कार्य में पुरानी ईंटों के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब संबंधित विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। विभाग का कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह स्वीकृत मानकों और प्रावधानों के अनुसार ही किया जा रहा है।
नहर परियोजना में क्या है मामला
विभाग के अनुसार, यह मामला तिरहुत मुख्य नहर के किलोमीटर 223.11 से 240.85 तक चल रहे पुनर्स्थापन और लाइनिंग कार्य से जुड़ा है। कार्यपालक अभियंता ने बताया कि पुराने ईंटों की लाइनिंग हटाकर वहां पीसीसी (PCC) लाइनिंग की जा रही है, जो स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप है।
पुरानी ईंटों का पुनः उपयोग क्यों
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नहर से निकली पुरानी ईंटों को फेंका नहीं जा रहा, बल्कि उनका सल्वेज वैल्यू के आधार पर आकलन किया गया है। उपयोग योग्य ईंटों को नहर के डॉवेल और बाएं तटबंध पर ईंट सोलिंग के काम में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहले से तय योजना का हिस्सा है।
सड़क निर्माण पर भी सफाई
सड़क निर्माण में पुरानी ईंटों के उपयोग को लेकर उठे सवालों पर भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। अधिकारियों ने बताया कि संवेदक द्वारा इस्तेमाल की जा रही सामग्री पूरी तरह टेंडर की शर्तों के अनुरूप है। अनुबंध के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत कार्य में पुरानी ईंटों के उपयोग का प्रावधान पहले से ही शामिल है।
कोई अनियमितता नहीं—विभाग
विभाग ने साफ शब्दों में कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की अनियमितता या धांधली का सवाल ही नहीं उठता। सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत दिशा-निर्देशों के तहत किए जा रहे हैं।
पर्यावरण और संसाधन बचत पर जोर
अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्यों में सामग्री का पुनः उपयोग न केवल संसाधनों की बचत करता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर और टिकाऊ तरीका है।
जनता को भरोसा
विभाग ने लोगों को आश्वस्त किया है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है और सभी प्रोजेक्ट तय मानकों के अनुसार ही पूरे किए जाएंगे।

















