बिहार पुलिस मुख्यालय ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच की कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। संजय कुमार सिंह और नीरज कुमार ने बताया कि इस अवधि में अपराधियों और नक्सलियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाए गए, जिससे आपराधिक नेटवर्क पर असर पड़ा है।
पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी से 22 अप्रैल 2026 के बीच कुल 10 मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुए, जिनमें 3 अपराधी मारे गए और 7 घायल हुए। इन कार्रवाइयों के जरिए कई कुख्यात गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है, जिससे कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है।
नक्सल विरोधी अभियान में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 3 लाख के इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2 लाख के इनामी अपराधी दीपक पांडेय ने भी सरेंडर कर दिया। पुलिस का मानना है कि इससे नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिली है।
संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए जिलावार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सक्रिय गिरोहों का डाटाबेस तैयार कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। खासकर भू-माफियाओं और अवैध संपत्ति के मामलों में कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को PMLA के तहत जब्ती के प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
सीमावर्ती जिलों सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण में विशेष अभियान चलाकर नारकोटिक्स तस्करी पर भी बड़ा प्रहार किया गया। हेरोइन, गांजा, अफीम और कोडीन सिरप की खेप जब्त कर कई तस्करों को गिरफ्तार किया गया। ड्रोन और एरियल सर्विलांस के जरिए निगरानी और सख्त की गई है।
एसटीएफ ने जनवरी से अप्रैल के बीच हत्या, लूट और डकैती के 38 संगीन मामलों में प्रभावी कार्रवाई की है। इसके साथ ही पुलिस बल की क्षमता बढ़ाने के लिए 1407 जवानों को प्रशिक्षण दिया गया, जिससे तकनीकी और ऑपरेशनल दक्षता में सुधार हुआ है।
साइबर अपराध के खिलाफ भी कार्रवाई तेज रही। एटीएम फ्रॉड, बैंक लोन फ्रॉड और डेटा बिक्री से जुड़े 11 मामलों का खुलासा किया गया, जिससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर नियंत्रण पाया गया।
पुलिस का दावा है कि इन लगातार अभियानों से राज्य में अपराध पर नियंत्रण मजबूत हुआ है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।
















