पूर्णिया में भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिले में वर्षों से रह रही नेपाली मूल की महिलाओं को अब भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन ने इसके लिए प्रखंड स्तर पर विशेष कैंप लगाने का निर्णय लिया है, जहां पात्र महिलाओं का पंजीकरण और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इन कैंपों का उद्देश्य महिलाओं को नागरिकता आवेदन की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस कार्य के लिए जिलाधिकारी अंशुल कुमार की ओर से एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न विभागों के अधिकारियों के सहयोग से आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाएगी।
प्रशासन के अनुसार, उन महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा जिन्होंने भारतीय नागरिकों से विवाह किया है और निर्धारित अवधि तक भारत में निवास कर रही हैं। नियमों के अनुसार, ऐसी महिलाएं नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती हैं।
सीमांचल और कोसी क्षेत्र के कटिहार, किशनगंज, अररिया और सुपौल जिलों में बड़ी संख्या में नेपाली मूल की महिलाएं शादी के बाद रह रही हैं।
प्रशासन का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन और जरूरी दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा, ताकि पात्र महिलाओं को समय पर नागरिकता मिल सके।














