पटना प्रशासन में उस वक्त हलचल मच गई जब जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने लोक शिकायत निवारण व्यवस्था में ढिलाई को लेकर सख्त रुख अपनाया। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्होंने साफ संदेश दिया—अब “काम में ढिलाई नहीं, जवाबदेही ही नियम है।”
डीएम ने कुल 126 मामलों में करीब 3 लाख 47 हजार 800 रुपये का आर्थिक दंड लगाया है, जबकि 25 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। अब तक 2 लाख 92 हजार 900 रुपये की वसूली भी हो चुकी है, जबकि बाकी राशि जल्द जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि देरी होने पर यह रकम संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटी जाएगी।
बैठक में डीएम ने दो टूक कहा कि अब सिर्फ फाइल बंद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता की संतुष्टि ही असली पैमाना होगी। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निपटारे में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना हर अधिकारी की जिम्मेदारी है।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि 165 नए मामलों के मुकाबले 218 मामलों का निपटारा किया गया, जो प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाता है। हालांकि, 22 मामले तय समयसीमा से बाहर पाए गए, जिस पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई।
डीएम ने ब्लॉक और अंचल स्तर पर भी सख्ती बढ़ाते हुए दानापुर बीडीओ और बिहटा थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण तलब किया, क्योंकि वे सुनवाई में अनुपस्थित पाए गए।
प्रथम अपील के 12,200 मामलों में से 11,934 का निपटारा किया जा चुका है, वहीं द्वितीय अपील के अधिकांश मामलों को भी सुलझा लिया गया है। इसके बावजूद डीएम ने स्पष्ट कर दिया कि शिथिलता पर अब जीरो टॉलरेंस नीति लागू होगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि आरटीपीएस और लोक शिकायत मामलों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर हर हाल में किया जाए, अन्यथा प्रति एक्सपायर्ड केस पर जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही सभी अंचल कार्यालयों में भूमि विवाद समाधान बैठकों को अनिवार्य कर उनके रिकॉर्ड को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया गया।
साफ है कि अब पटना प्रशासन फाइलों की धीमी गति से आगे बढ़कर नतीजों की रफ्तार और जवाबदेही पर फोकस कर रहा है, और इस सख्त कार्रवाई के जरिए पूरे सिस्टम को एक मजबूत संदेश दे दिया गया है।
















