पटना:
बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य में NDA सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कई नए और पुराने चेहरे मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है।
जानकारी के मुताबिक NDA सरकार में शामिल होने वाले नेताओं को शपथ ग्रहण के लिए फोन जाने शुरू हो गए हैं। बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी(आर) और HAM के कोटे से कुल 31 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाए जाने की चर्चा है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड से लगभग 16-16 मंत्री शपथ ले सकते हैं। हालांकि अंतिम सूची को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जेडीयू की ओर से जिन नेताओं को शपथ ग्रहण के लिए बुलावा मिलने की खबर है, उनमें लेसी सिंह, मदन सहनी, भगवान सिंह कुशवाहा, श्वेता गुप्ता, सुनील कुमार और दामोदर रावत का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक श्वेता गुप्ता को नए चेहरे के तौर पर मौका दिया जा सकता है। वहीं कई अनुभवी नेताओं पर भी नेतृत्व ने भरोसा जताया है।
दूसरी ओर बीजेपी की तरफ से राम कृपाल यादव, केदार गुप्ता, नीतीश मिश्रा, मिथलेश तिवारी, रमा निषाद, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल, प्रमोद चंद्रवंशी, लखविंदर पासवान, संजय टाइगर, इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र और नंद किशोर राम जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का गठन कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक HAM की ओर से संतोष सुमन को शपथ के लिए कॉल आया है। वहीं एलजेपी(आर) के कोटे से भी दो नेताओं को मंत्री बनाए जाने की सूचना है। हालांकि पार्टी की ओर से नामों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। NDA नेतृत्व जातीय समीकरण साधने के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं और नए चेहरों को मौका देकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। इसके जरिए गठबंधन अपने सामाजिक आधार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पूरे बिहार की निगाहें पटना पर टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि NDA का यह नया राजनीतिक दांव आगामी चुनावी समीकरणों पर कितना असर डालता है।
















