सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में गुरुवार को बिहार की राजनीति में इतिहास, विरासत और नए नेतृत्व का अनोखा संगम देखने को मिला। राजधानी गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में 32 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली।
इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्रा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी को मंत्री बनाया गया।
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के महज 22 दिन बाद हुए इस विस्तार को बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार की एंट्री को लेकर रही। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे निशांत ने पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर साफ संकेत दिया कि अब बिहार की राजनीति में उनका भी सक्रिय रोल शुरू हो चुका है।
नई कैबिनेट में भाजपा से 15, जदयू से 13, एलजेपी (रामविलास) से 2 और HAM व RLM से 1-1 मंत्री शामिल किए गए हैं। पहले चरण में श्रवण कुमार, विजय कुमार सिन्हा, लेशी सिंह और दिलीप कुमार जायसवाल समेत कई बड़े नेताओं ने शपथ ली।
समारोह में नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया। कार्यक्रम के बाद एक दिलचस्प पल भी देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री मोदी ने नीतीश कुमार को अपने पास बुलाया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और उसी दौरान नीतीश कुमार ने पीएम मोदी का कंधा पकड़कर हल्के अंदाज में हिलाया। यह दृश्य कुछ ही देर में सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट कैबिनेट का यह विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जातीय समीकरण, राजनीतिक विरासत और आने वाले चुनावी रण की बड़ी रणनीति का हिस्सा भी है।














