भागलपुर जिले के Sultanganj से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। नगर परिषद कार्यालय में हुए चर्चित गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल सभापति Rajkumar Guddu ने आखिरकार 12 दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया। उनका इलाज पटना के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां शनिवार 9 मई को उन्होंने अंतिम सांस ली।
जानकारी के मुताबिक हमले के दौरान उनके शरीर में दो गोलियां फंसी रह गई थीं, जिससे उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन चोटें बेहद गंभीर होने के कारण लंबे समय तक ऑपरेशन भी संभव नहीं हो सका। आखिरकार शनिवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस खबर के फैलते ही सुल्तानगंज और भागलपुर जिले में शोक की लहर दौड़ गई। नगर परिषद कार्यालय से लेकर उनके आवास तक मातम का माहौल है। समर्थकों, स्थानीय लोगों और परिजनों की आंखें नम हैं। पूरे इलाके में भारी आक्रोश भी देखा जा रहा है। लोग अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
घटना ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब एक जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी घटना पर चिंता जताते हुए दोषियों को जल्द सजा दिलाने की मांग की है।
दरअसल, 28 अप्रैल 2026 को Sultanganj Nagar Parishad कार्यालय में दिनदहाड़े अपराधियों ने घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इस हमले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि सभापति राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे बिहार को हिला कर रख दिया था। सरकारी कार्यालय के भीतर खुलेआम हुई फायरिंग ने प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। लोग हैरान थे कि आखिर अपराधी इतनी आसानी से नगर परिषद कार्यालय में घुसकर वारदात को अंजाम देकर कैसे फरार हो गए।
जांच के दौरान पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुख्य आरोपी कुख्यात अपराधी Ramdani Yadav तक पहुंच बनाई। घटना के करीब 12 घंटे बाद ही पुलिस ने मुठभेड़ में उसे मार गिराया। इस कार्रवाई में उसका एक साथी भी गंभीर रूप से घायल हुआ था।
पुलिस ने इस एनकाउंटर को अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश बताया था। हालांकि इस पूरे मामले ने बिहार में अपराध, प्रशासनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजकुमार गुड्डू के निधन के बाद पूरे क्षेत्र में श्रद्धांजलि सभाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर बिहार में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ कैसे गया।
















