Rahul Gandhi On Modi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील पर अब सियासी घमासान शुरू हो गया है। तेलंगाना के सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने, विदेशी मुद्रा बचाने और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील की थी। इसके बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में लोगों से कहा कि कोरोना काल के दौरान अपनाई गई “वर्क फ्रॉम होम”, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को फिर से बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करना देशहित में जरूरी है।
पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील भी की। उनका कहना था कि भारत बड़े पैमाने पर सोने का आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। इसके साथ ही उन्होंने खाने के तेल की खपत कम करने और किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाकर प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि यह सलाह नहीं बल्कि सरकार की विफलता का प्रमाण है। राहुल गांधी ने कहा, “मोदी जी ने जनता से कहा – सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने का तेल कम करो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं, बल्कि नाकामी के सबूत हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि अब सरकार लोगों को यह बताने लगी है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार हर बार अपनी जिम्मेदारी जनता पर डालने की कोशिश करती है ताकि जवाबदेही से बचा जा सके।
इधर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तेल संकट और बढ़ती महंगाई के बीच सरकार आर्थिक दबाव कम करने के उपाय तलाश रही है। वहीं विपक्ष इसे आम लोगों पर बोझ डालने और आर्थिक प्रबंधन की विफलता के तौर पर पेश कर रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
















