मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की अध्यक्षता में बुधवार को पटना सचिवालय में बिहार कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित की गई। 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली पूर्ण मंत्रिमंडल बैठक रही। इससे पहले हुई बैठकों में मुख्यमंत्री के साथ केवल दोनों उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और विजेंद्र यादव मौजूद रहे थे। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह चौथी कैबिनेट बैठक थी, लेकिन हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सभी 34 मंत्रियों की मौजूदगी में यह पहली पूर्ण बैठक मानी जा रही है।
बैठक में बिहार के विकास, निवेश, उद्योग, प्रशासनिक सुधार और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा की गई। मंत्रिमंडल ने कुल 18 प्रस्तावों पर अपनी मंजूरी दी। सरकार की ओर से इसे विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बताया गया है।

कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा फैसला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्ते यानी डीए को लेकर लिया गया। सरकार ने महंगाई भत्ता 257 फीसदी से बढ़ाकर 262 फीसदी करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से कर्मचारी संगठन डीए बढ़ाने की मांग कर रहे थे, जिसके बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है।
बैठक में राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और नए उद्योगों की स्थापना को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सरकार बिहार में औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दे रही है। इसके अलावा कई विभागों से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
सूत्रों के अनुसार सरकार आने वाले दिनों में इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क निर्माण और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। नई टीम के साथ हुई इस पहली पूर्ण कैबिनेट बैठक को सरकार के आगामी विकास रोडमैप के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी सरकार आने वाले महीनों में विकास योजनाओं और कर्मचारियों से जुड़े फैसलों के जरिए अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।
















